पुलिस अधीक्षक खीरी ने कच्ची शराब को बंद कराने को लेकर पूरे जनपद में चला रखा है अभियान फिर भी गोला गोकर्णनाथ व आसपास में खुलेआम बिक रही है जहरीली कच्ची शराब | New India Times

वी.के.त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ लखीमपुर-खीरी (यूपी), NIT:

पुलिस अधीक्षक खीरी ने कच्ची शराब को बंद कराने को लेकर पूरे जनपद में चला रखा है अभियान फिर भी गोला गोकर्णनाथ व आसपास में खुलेआम बिक रही है जहरीली कच्ची शराब | New India Times

पुलिस अधीक्षक खीरी ने कच्ची शराब को बंद कराने को लेकर पूरे जनपद में अभियान चला रखा है फिर भी गोला गोकर्णनाथ व आसपास के इलाकों में खुलेआम कच्ची शराब बिक रही है जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहा है।

जानकारी के अनुसार दलित बाहुल्य ग्राम कोंधवा में तमाम परिवार तबाह हो चुके हैं, आलम यहां तक पहुंचा है कि आज परिवार में केवल महिलाएं ही बची है उन परिवारों की कहानी आज सामने है जो कि कभी पिता और पुत्रगणों से भरा हुआ परिवार सब कच्चीशराब में लिपटकर दफन हो गया है अब केवल बची महिलाएं ही घर का संचालन करने को विवश हैं?
सूत्रों की मानें तो तमाम परिवार तबाह होकर अपनी चल अचल सम्पत्ति को औने पौने में बेचकर बेघर हुए और बाद में असमय मौत का शिकार बने और अब चिराग जलाने वाले तक नहीं रहे पर जहरीली कच्ची शराब का खेल जिम्मेदारों की सरपरस्ती में जारी है जबकि आबकारी विभाग कहती है कि हम ईमानदार हैं और पुलिस कहती हैं कि हम पैसा नहीं लेते हैं?

विदित हो कि उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी की कोतवाली गोला गोकर्णनाथ/ छोटीकाशी के नाम से विख्यात नगरी गोला गोकर्णनाथ जो कि जनपद का मुख्य नगर है यहां पर भौगोलिक दृष्टि से चारों तरफ से वनों से अच्छादित है और हरियाली से भरपूर है पर जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की उपेक्षा के चलते जहरीली कच्ची शराब का उत्पादन व बिक्री से यह व्यवसाय कुटीर उधोग बन चुका है। शराब बनाने के लिए नदियां, गन्ने के खेत तथा मकान हैं और पड़ोस में हराभरा जंगल है। आसपास शराब बनाने की सामग्री बड़े पैमाने पर बिका करती है। सबसे खास बात यह है कि यहां रोज शराब बनती है और पियक्कड़ों का मेला लगता है पर यह सब न तो आबकारी विभाग को दिखाई पड़ता है और न ही पुलिस को जबकि शराब अपराध की जननी है और अपराधियों की चहलकदमी भी बनी रहती है। पुलिस अधीक्षक खीरी जो कि ईमानदार व तेजतर्रार हैं उन्होंने समूचे जनपद के थानों को कच्ची शराब के खिलाफ अभियान चलाने का आदेश देकर नजर भी रख रही हैं कि उनके आदेश का कितना पालन होता है पर गोला पुलिस गंम्भीर नहीं है।
बताते चलें कि जहरीली कच्ची शराब के उत्पादन में शराब बनाने वालों ने यूरिया खाद, खाने वाली तम्बाकू, नशीली गोलियां, ब्रेकरी में उपयोग होने वाला पाउडर, धतूरा व घातक रसायन का प्रयोग करते हैं, यह शराब अधिक नशीली होती है और सस्ती पड़ती है। शराब बनाने वालों में पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक होती हैं और वह पियक्कड़ों को सुविधाएं व सुरक्षा का भरोसा भी देती हैं। जब शराब पीने के लिए पियक्कड़ आता है तो घर के पुरुष बाहर चौकीदारी करता है और महिला शराब को पिलाती है और शराबी मस्त होकर जब चलता है तो वह अश्लील भाषा का खुला प्रयोग करता है जिसको लेकर आए दिन वाद विवाद भी होता है। कभी कभी हालात भयावह हो जाते हैं और मामला थाना कोतवाली तक पहुंच जाता है जोकि पुलिस की कमाई का जरिया भी बन जाता है। कभी अधिक शराब पीने से मदहोश शराबी की जेब भी झार ली जाती है और वह इधर उधर गिरता फिरता जाता है तो वह कभी असमय मौत का शिकार बन जाता है।

गौरतलब हो कि भुसौरिया, जहानपुर, मदनपुर, लक्ष्मणजती आदि गांवों में यह धंधा काफी होता है, वहीं कोंधवा में महातिया के नाम से जाना जाने वाला परिवार जो कि कई एकड़ का जोतकार था पर पहले उसने मिटटी को बेचकर शराब पीना चालू किया बाद में एक एक कर पहले बड़ा पुत्र स्वामी दयाल, बाद में पिता रामचन्द्र उसके बाद छोटा पुत्र अमरीक कच्ची शराब पीने के चलते असमय मौत का शिकार बने, अब घर में केवल विधवाएं हैं और वे अपने अपने हिस्से की जमीन बेचकर घर को चलाने को मजबूर हैं। यही हाल राजेंद्र देवीदीन का है जिसने जमीन बेचकर जमकर कच्ची शराब पी और असमय मौत का शिकार बना। ग्राम के ही कढिले, प्रभू, निरंजन, राजकुमार, रामविलास, छोटेलाल, खुशीराम, कालीचरण आदि जहरीली कच्ची शराब पीने के चलते असमय मौत का शिकार बने। इसी प्रकार कई परिवार कच्ची जहरीली शराब के पीने से अपनी चल अचल सम्पत्ति को बेचकर इस दुनियां को अलविदा कर गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक जहरीली शराब बनाने वाले गुड्डू, हरद्वारी, मिश्री, सागर, कामता, खुर्दा, बनवारी, नेतराम, लक्ष्मण, टेना, रमेश, जीवन, रामपाल, बालक, श्रीकृष्ण, गुड्डी पत्नी चंदन, गुडडी पत्नी ओमनरायन, दुजई आदि मुख्य हैं।
जहरीली कच्ची शराब को बनाने व बेचने वाले ग्राम कोतवाली गोला के ग्रामों में कुशमी कालोनी, भटपुरवा कालोनी जहां पर शीरा रखने व बेचने के जमीन के अंदर टैक बना रखे हैं, यहां से शीरा लेकर उल्लनदी के किनारे उत्पादन करते हैं और बिक्री अपने ग्राम के अलावा ग्रामीण बाजार भैठिया में खुले आम बिक्री होती है। और कैरियर के माध्यम से आसपास के इलाकों में पहुंचाई जाती है जहां बेचने वाले खरीदने व बेचने का बडे स्तर पर काम होता है एक अपुष्टि के अनुसार शीरा व्यवसाइयों ने लाखों रुपए हर माह पुलिस को देते हैं। अब रहा गोला नगर का हाल तो लालबहादुर शास्त्री इंटरकाॅलेज के पास कुछ बदनाम परिवार रहते हैं और उनका मुख्य व्यवसाय जहरीली कच्ची शराब है। यहां पर पियक्कड़ों की चहलकदमी बनी रहती है। आगे खुटार रोड निकट डाॅक्टर बंगाली के पीछे भी हालात कमोबेश एक जैसे हैं, यहां पर शराब बिकती रहती है और मोहल्ले का विरोध भी है पर वह मुखर नहीं पाता है।

घर घर बनती है शराब, सुबह से शाम तक पियक्कड़ों का उमडता रहता है मेला

ग्राम कोंधवा, बहेरा, भुसौरिया, जहानपुर, भवानी गंज, आदि जगहों पर कच्ची शराब बन और बिक रही है। यहां आबकारी विभाग को ना तो बनाने वाले मिलते हैं और ना ही बेचने वाले, रही पुलिस की बात तो उसके पास समय नहीं है। आरोप है कि दोनों जिम्मेदार विभाग रिश्वतखोरी से साफ इंकार करते हैं तो यहां पर एक बहुत बडा सवाल है कि आखिर कौन हप्ता वसूलता है? आलम यहां तक है कि शराब बनाने के लिए छोटे से ग्राम में कुंटलों रोज गुड बिकती रहती है। चाट, पकौड़ी, अंडे आदि की दुकानें संचालित हैं जो कि भय मुक्त होने की बात प्रमाणित करती हैं। इन ग्रामों में अपराधिक पृवत्ति के अपराधी व कुछ दुपैहिया वाहन तो कुछ चौपैहिया वाहन तो कुछ आटो रिक्शा व साइकिलों से शराबियों का आना जाना लगा रहता है।

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