कर्पूरी के सपनों को पूरा करने में लगे हैं नमो: उपमुख्यमंत्री | New India Times

अतीश दीपंकर, ब्यूरो चीफ पटना (बिहार), NIT:

कर्पूरी के सपनों को पूरा करने में लगे हैं नमो: उपमुख्यमंत्री | New India Times

बिहार विधान परिषद के उपभवन स्थित सभागार में ‘कबीर के लोग‘ की ओर से ‘कर्पूरी जयंती, मतदाता दिवस व वित्तीय समावेशन’ पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर्पूरी ठाकुर के सपनों को पूरा करने में लगे हैं। कांग्रेस द्वारा लटका कर रखे गए मुंगेरीलाल और मंडल कमीशन की रिपोर्ट कर्पूरी ठाकुर और वी पी सिंह ने लागू किया। जिस ऊंची जाति के गरीबों और सभी वर्ग की महिलाओं को कर्पूरी जी ने 3 प्रतिशत आरक्षण दिया था जिसे बाद में राजद की सरकार ने समाप्त कर दिया था, मगर नमो ने संविधान में संशोधन कर सवर्ण गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया है। कर्पूरी फॉर्मूला के तर्ज पर ही आज केन्द्र सरकार अति पिछड़ों की सूची के वर्गीकरण के लिए आयोग का गठन किया है।

प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत पूरे देश में जहां पिछले 5 साल में 33.89 करोड़ खाते खोले गए जिनमें 88 करोड़ जमा हुए हैं वहीं बिहार में खोले गए 3.60 करोड़ खाते में 10516 करोड़ जमा है। खाता खोले जाने से आमलोगों का सशक्तीकरण और दलाल व बिचौलियों का खात्मा हुआ है। करीब 7 करोड़ फर्जी व डुप्लीकेट लाभार्थियों की छंटनी हुई जो इटली व इंग्लैंड की आबाद के बराबर है।

श्री मोदी ने कहा कि कभी राजीव गांधी ने कहा था कि केन्द्र से चलने वाला 1 रुपये में से मात्र 15 पैसे लाभार्थियों तक पहुंचता है। नमो की सरकार ने पूरे देश में 5 लाख 80 हजार करोड़ डीबीटी के जरिए सीधे लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर किया है। अगर राजीव गांधी का दौर रहता इनमें से 4 लाख 50 हजार करोड़ की लूट हो जाती। जनधन खाते को आधार और मोबाइल नम्बर से जोड़ कर भारत ने वह काम कर दिखाया है जो अमेरिका जैसा देश भी नहीं कर पाया है।

वित्तीय समावेशन का ही नतीजा है कि बिहार के 50 लाख लोगों को मात्र 12 रुपये में प्र.मं. सुरक्षा बीमा योजना का लाभ मिला है जिनमें से 1276 लोगों ने 2-2 लाख रुपये का लाभ लिया है। इसके अलावा लोगों को प्र. मं. जीवन ज्योति बीमा योजना,अटल पेंशन योजन का सुरक्षा कवच भी मिला है।

भारतीय मतदाता को जागरूक बताते हुए कहा कि यहां मतदान का प्रतिशत अमेरिका से ज्यादा है। मतदान के अधिकार के लिए दुनिया के अन्य देशों के साथ भारत में काफी संघर्ष करना पड़ा है। बिहार में महिलाओं को काफी देर से मतदान का अधिकार मिला। सउदी अरबिया में तो 2011 में महिलाओं को मताधिकार और 2018 में ड्राइविंग लाइसेंस का अधिकार मिला।

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