कासिम खलील, ब्यूरो चीफ बुलढाणा (महाराष्ट्र), NIT:

वन, वन्यजीव व पेड़ों के संरक्षण तथा संवर्धन की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई है। पेड़ों की अवैध कटाई को रोकना वन विभाग का कर्तव्य है किंतु बुलढाणा उपवन संरक्षक कार्यालय में कुछ और ही देखने को मिला है, यहां कार्यालय के अहाते में मौजूद कई पेड़ों की अवैध तरीके से कटाई कर दी गई है, जिससे यह सवाल खड़े हो रहा है कि वनविभाग केवल दूसरों को ही ज्ञान बांटने का काम तो कर रहा है लेकिन खुद नियमों की धज्जियां उड़ाने पर आमदा है।
बुलढाणा के उपवन संरक्षक कार्यालय के सामने कुछ वर्ष पहले खाली पड़ी जमीन पर वृक्षों की बुआई की गई थी जिनके संरक्षण के लिए तार फेंसिंग भी की गई थी जिसके कारण ये वृक्ष काफी बड़े बड़े हो गए थे। पिछले कुछ दिन पहले परिक्षेत्र की सफाई के नाम पर उपवन संरक्षण कार्यालय के सामने मौजूद इन पेड़ों पर बेदर्दी से “आरी” चलाते हुए कई पेड़ों का कत्लेआम कर दिया गया है. एक तरफ किसानों के पेड़ों की कटाई हो या महामार्ग के विस्तार के लिए बीच में आने वाले पेड़ों की कटाई का मामला, इसके लिए वन विभाग जटिल कागजी खानापूर्ति के नाम पर लोगों को परेशान करता है जबकि दूसरी तरफ अपने अहाते के पेड़ बेखौफ काटता है. अब यह सवाल उपस्थित होता है कि वन विभाग ने अपने अहाते में मौजूद इन पेड़ों की कटाई के लिए कौन से नियम का पालन किया है? उप वन संरक्षण कार्यालय नगर पालिका की हद में है इसलिए इन पेड़ों की कटाई के लिए नगर परिषद से अधिकृत अनुमति ली गई है क्या? वनविभाग के पास इस प्रश्न का उत्तर शायद “ना” में होगा.इस मामले में बुलढाणा के डिएफओ श्री.माली से उनकी प्रतिक्रिया लेने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया किंतु उनसे संपर्क नही हो पाया.
चोरी छुपाने “खुट” को लगाई आग

बुलढाणा उपवन संरक्षक कार्यालय के सामने मौजूद पेड़ों की कटाई तत्कालीन डीएफओ श्री.वाढई के आदेश पर किए जाने की बात सामने आई है. पेड़ों की कटाई के बाद कटे हुए पेडों के खुट जगह पर मौजूद थे. इस अवैध कटाई को छुपाने के लिए वन कर्मियों ने खुट के ऊपर काडी- कचरा डालकर खुटों को आग लगाई ताकि खुट पूरी तरह से जल जाएं और अवैध कटाई का सुबूत बाकी ना रहे किंतु चोरी कभी छुपती नहीं है, दरअसल ये खुट पूरी तरह से जले नहीं और जस के तस अपने स्थान पर मौजूद हैं।
