क्या है इस बार मकर संक्रांति पर विशेष? जानिए सूर्यदेव को कैसे करें प्रसन्न | New India Times

वी.के.त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ लखीमपुर-खीरी (यूपी), NIT:

क्या है इस बार मकर संक्रांति पर विशेष? जानिए सूर्यदेव को कैसे करें प्रसन्न | New India Times

सबसे पहले हमारे प्रिय देशवासियों को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य की उपासना को अत्यंत शुभ फलदायक माना गया है। मकर संक्रांति का पर्व हर साल आमतौर पर चौदह जनवरी को आता है। इस साल में मकर संक्रांति पर्व का शुभ मुहूर्त पन्द्रह जनवरी के दिन भी है।

सूर्यदेव को सभी नौ ग्रहों में सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्यदेव न्याय के देवता शनि देव के पिता हैं। सूर्यदेव किसी भी जातक को सरकारी नौकरी दिलाने में अहम योगदान करते हैं साथ ही किसी भी व्यक्ति के जीवन में यश का कारक भी सूर्य ही हैं।
मकर संक्रांति पर इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए बेहद खास माना गया है।
इस बार संक्रांति का वाहन सिंह एवं उपवाहन गज (हाथी) होगा। इस वर्ष में संक्रांति श्वेत वस्त्र धारण किए स्वर्ण-पात्र में अन्न ग्रहण करते हुए कुंकुम का लेप किए हुए उत्तर दिशा की ओर जाती हुई आ रही है।
जिस जातक की कुंडली में सूर्य ग्रह शुभ स्थिति में होता है वह उच्चपद प्राप्त करता है।
साथ ही सूर्य के प्रभाव से उसकी ख्याति और प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होती है। सूर्यदेव सिंह राशि के स्वामी ग्रह भी हैं। सूर्य की दशा छः वर्ष के लिए होती है। सूर्य का रत्न माणिक्य है।
सूर्य की प्रिय वस्तुएं गाय, गुड़, और लाल वस्त्र आदि हैं। तांबा और सोना को सूर्य की प्रिय धातु माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को प्रसन्न करने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं, यह अत्यंत शुभ फलदायक साबित होते हैं।
शास्त्रों में सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए रविवार का दिन सबसे उत्तम माना गया है। रविवार के दिन गेहूं और गुड़ गाय को खिलाने या किसी ब्राहमण को दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही सूर्य मजबूत होता है।

विष्णु पुराण के अनुसार रविवार के दिन सूर्यदेव को आक का एक फूल श्रद्धा पूर्वक अर्पित करने से मनुष्य को दस अशर्फियां दान का फल मिलता है। इतना ही नहीं इस फूल को नियमित चढ़ाने से व्यक्ति करोड़पति बन सकता है।
भगवान सूर्य को खुश करने के लिए रात के समय कदंब और मुकुल के फूल अर्पित करना श्रेयस्कर माना जाता है। सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए बेला का फूल ही एक ऐसा फूल है जिसे दिन या रात किसी वक्त चढ़ा सकते हैं।
इसके अलावा कुछ फूल ऐसे भी हैं, जिसे सूर्य देव को कदापि नहीं चढ़ाना चाहिए। ये पुष्प हैं गुंजा, धतूरा, अपराजिता और तगर आदि।

“मकर संक्रांति व्रत की पौराणिक विधि, पढ़ें इस दिन का विशेष मंत्र।”

हिन्दू धर्म के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना मकर-संक्रांति कहलाता है। मकर-संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। इस दिन व्रत और दान (विशेषकर तिल के दान का) का काफी महत्व होता है। सूर्य ज्ञान, आध्यात्म और प्रकाश का प्रतीक है।
प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष में मकर संक्राति का त्योहार चौदह और पन्द्रह जनवरी को मनाया जा रहा है।
यह सूर्य भगवान का त्योहार है इस दिन पर सूर्य दक्षिण की यात्रा समाप्त करते हैं और उत्तर दिशा की तरफ बढ़ते हैं।
मकर संक्रांति व्रत विधि
इस दिन पावन नदियों में श्रद्धापूर्वक स्नान करें। इसके बाद, पूजा-पाठ, दान और यज्ञ क्रियाओं को करें। तीर्थों में या गंगा स्नान और दान करने से पुण्य प्राप्ति होती है।
प्रातः काल नहा-धोकर भगवान शिव जी की पूजा तेल का दीपक जलाकर करें। भोलेनाथ की प्रिय चीजों जैसे धतूरा, आक, बिल्व पत्र इत्यादि को अर्पित करें।
भविष्यपुराण के अनुसार सूर्य के उत्तरायन या दक्षिणायन के दिन संक्रांति व्रत करना चाहिए।
इस व्रत में संक्रांति के पहले दिन एक बार भोजन करना चाहिए।
संक्रांति के दिन तेल तथा तिल मिश्रित जल से स्नान करना चाहिए।
इसके बाद सूर्य देव की स्तुति करनी चाहिए। ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
संक्रांति के पुण्य अवसर पर अपने पितरों का ध्यान और उन्हें तर्पण अवश्य प्रदान करना चाहिए।
सूर्यदेव को अर्घ्य दें। आदित्य हृदय स्तोत्र का एक सौ आठ बार पाठ करें।
मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त में सिद्ध सूर्य यंत्र को सूर्य मंत्र का जप करके पहनने से सूर्यदेव तरक्की की राह आसान बना देते हैं तिल युक्त खिचड़ी, रेवड़ी, लड्डू खाएं एवं दूसरों को भी खिलाएं ब्राह्मण को गुड़ व तिल का दान करें और खिचड़ी खिलाएं वेदों में वर्जित कार्य जैसे दूसरों के बारे में गलत सोचना या बोलना, वृक्षों को काटना और इंद्रीय सुख प्राप्ति के कार्य इत्यादि कदापि नहीं करने चाहिए जरूरतमंद को कंबल, वस्त्र, छाते, जूते-चप्पल इत्यादि का दान करें।

“संक्रांति पूजा का समय।”

संक्रांति के दिन पुण्य काल में दान, स्नान व श्राद्ध करना शुभ माना जाता है।
मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त
पन्द्रह जनवरी 2019
पुण्य काल का मुहूर्त : 07:19 बजे से 12:30 बजे तक।
अवधि : 5 घंटे 11 मिनट
संक्रांति क्षण : 20:05, 14 जनवरी 2019 की शाम
महा पुण्यकाल का मुहूर्त : 15 जनवरी को 07:19 बजे से 09:03 बजे तक
अवधि : 1 घंटा 43 मिनट

“मकर संक्रांति पूजा मंत्र।”

मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव की निम्न मंत्रों से पूजा करनी चाहिए:
“ॐ सूर्याय नम:ॐ आदित्याय नम: ॐ सप्तार्चिषे नम:”
अन्य मंत्र हैं
“ऋगमंडलाय नम:।”
ॐ सवित्रे नम:,ॐ वरुणाय नम:,ॐ सप्तसप्त्ये नम:,
ॐ मार्तण्डाय नम:,ॐ विष्णवे नम:।”
मकर संक्रांति सूर्य मंत्र:

मकर संक्रांति के दिन इस विशेष सूर्य मंत्र का जाप किया जाना चाहिए :

“ॐ ह्रीम ह्रींम ह्रौमं स: सूर्य्याय नमः।”

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