दलित पहले भी दलित था, अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग जो पहले भी गरीब था वह आज भी गरीब है: मो. तारिक  | New India Times

मोहम्मद तारिक, भोपाल, NIT; ​दलित पहले भी दलित था, अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग जो पहले भी गरीब था वह आज भी गरीब है: मो. तारिक  | New India Timesढोंगी धर्मनिरपेक्ष दल कांग्रेस नेता दिग्गी राजा ने कहा मदरसे, संघ द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिर एक जैसे नफरत फैलाते हैं! कांग्रेस नेता और राष्ट्रीय महासचिव दिग्गी राजा आखिर क्यों बौखला गए, दिल्ली न प्रदेशों में है तुम्हारी सरकार, अकड़ तो सिर्फ मुर्दे में होती है। धर्मनिरपेक्ष दल के नेता सुन लो मेरी ललकार, चुनाव हुए तो फिर भी न आएगी कांग्रेस की सरकार। वोट बैंक समझे न समझे, कांग्रेस देश विभाजन के समय की स्थिति में जाने को तैयार ! 

 हां यह सत्य है कि भारत में बाहरी योद्धाओं के प्रवेश से पूर्व भी देश में अलग-अलग भागों में रजवाड़ों की सीमाओं की लकीरों में बटा हुआ था। कहीं राजपूत तो कहीं मराठवाड़ा तो कहीं गोंड तो कहीं जातियों के आधार पर ही बंटा हुआ था सिहासन यहां का ! तो कहीं कंस दुर्योधन तो कहीं शकुनी मामा जैसे तिकड़म वालों की बलि चढ़ता रहा होगा मानव, कहीं द्रोपदी का चीर हरण, तो कहीं विष-कन्या के किस्से भी सुने हमने ! सिकंदर को बताते रहे जालिम आज के भारत सुन लो मेरी फरियाद अगर तुम्हें याद हो तो मानव जाती रहेगी हमेशा ही मानव जाति के साथ ! 

 कब तक तुम दूसरों पर यह धर्म राजनीति जातिवाद का ढिंढोरा पीट-पीट कर बतलाते रहोगे कि तुम धर्मनिरपेक्षतावादी ! बोल रही तस्वीरें तुम भी तो हो कट्टरवादी अवसरवादी ! पहले मुगलिया सल्तनत फिर अंग्रेजों के मालगुजार बन सत्ता सुख किसने पाया, धर्म और जात के नाम पर तुम भी तो झगड़ा करवा कर “देश का विभाजन धर्म-आधारित” किसने कराया ! कांग्रेस के चोले में छुपी हुई अंग्रेजो की नीति लड़ाई-झगड़ा कराओ राज करो ! 

 दलित पहले भी दलित था अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग दो जो पहले भी गरीब था वह आज भी गरीब है ! उसको याद है स्विस बैंक में तुम्हारे हैं खाते काले चिट्ठे और कालाधन जमा कराया है ! भारतीय सेना के हथियारों बोफोर्स, जैसे सौदों में दलाली कर तुमने क्या गुल खिला कर देश भक्ति का वाह क्या खूब पाठ पढ़ाया है ! बुढ़ापे में जवान बेटे के सामने जवानी का क्या रंग दिखाया है ! महात्मा गांधी बापू को अपना आदर्श बताने वाली चर्खे वाली कांग्रेस वाह क्या खूब कर्तव्य निभाया है !अपने स्वार्थों की खातिर हिंदू मुस्लिम को बांट कर सिहासन पाने की ललक में देश को ही धर्म आधारित बटवारा विभाजन कर पाट दिया ! 

  सात दशक पहले धर्मनिरपेक्ष दलों के शासन काल से जारी है शिक्षा नीति बनाई वह आज भी निरंतर जारी है ! भारतीय मुस्लिम समाज को आधुनिक शिक्षा के केंद्रों से दूर रखने कोई कहे सामूहिक कार्यक्रमों में श्लोक पढ़ने की अनिवार्यत: दूसरी तरफ तुम्हारे केंद्र व राज्य शासन में ही मदरसा अनुदान प्रथा चालू हुई ! भारतीय समाज से भारतीय मुस्लिम को काटकर तुम आज मदरसों के नाम पुनः सत्ता पाने जहर उगल रहे, दिग्गी तुम इतना तो बतलाओ कि कांग्रेस को दलदल में पहुंचा कर फिर भी कितना रंग बदल रहे हो ! आखिर यह तो बताओ जो तुम्हें बुलाते मुलला, मौलवी और मुस्लिम नेता तुम्हारे हिमायती उनको अब क्या कहकर समझाओगे ! अब तुम किस मुंह से हिंदू मुस्लिम का सामना कर पाओगे !

 श्री श्री दिग्विजय सिंह जी चित्र में देखिए तो मुझ जैसा कार्यकर्ता संघ और राष्ट्रीय नेता गणों के साथ ! जो तुम्हारे धर्मनिरपेक्ष दल में कभी न मिलता मुझ भारतीय मुस्लिम को सम्मान !

                         “अब तो वैचारिक द्वंद हैं। ”

                  @मो. तारिक (स्वतंत्र लेखक)

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