अर्वाचीन इंडिया स्कूल में सांस्कृतिक खोज, अन्वेषण तथा वैचारिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत बांग्लादेश और ऑस्ट्रिया से पधारे विदेशी मेहमान | New India Times

मेहलक़ा अंसारी, ब्यूरो चीफ बुरहानपुर (मप्र), NIT:

अर्वाचीन इंडिया स्कूल में सांस्कृतिक खोज, अन्वेषण तथा वैचारिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत बांग्लादेश और ऑस्ट्रिया से पधारे विदेशी मेहमान | New India Times

अर्वाचीन इंडिया स्कूल के जनसंपर्क अधिकारी मिर्ज़ा राहत बेग ने बताया कि अर्वाचीन इंडिया स्कूल में विदेशी शोधकर्ताओं का दल मेहमान बनकर आया, जिसमें केरल के श्रीजी कृष्णन सहित बांग्लादेश की नफ़ीसा इक़बाल एवं अदनान सिद्दीक़ी तथा आस्ट्रिया से छात्र मार्टिन शामिल थे। इस अवसर पर स्कूल की वरिष्ठ शैक्षणिक सलाहकार श्रीमती कला मोहन, संस्था अध्यक्ष श्रीमती राखी मिश्रा, निदेशक अमित मिश्रा, प्राचार्य उज्जवल दत्ता, उपप्राचार्य श्रीमती प्रतिभा पटेल, शैक्षणिक प्रमुख सुरेश नायर, अभिरुचि केन्द्र प्रभारी अंजलि पिंपलीकर, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी विशाल गोजरे आदि परिचर्चा में शामिल हुए।

वरिष्ठ शैक्षणिक सलाहकार श्रीमती कला मोहन ने कहा कि दूसरों के जीवन में शामिल होना और दूसरों को अपने जीवन में शामिल करना ही संस्कृति है। संस्कृति ही एक मात्र माध्यम है जो समस्त सीमाओं और दायरों को लांघकर मनुष्य को मनुष्य के समीप लाती है। श्रीमती राखी मिश्रा ने विदेशी मेहमानों का स्वागत करते हुए बुरहानपुर के इतिहास एवं संस्कृति से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि “दुनिया के कुछ हिस्से ऐसे हैं जहां एक बार जाने के बाद वे आपके मन में बस जाते हैं और उनकी याद कभी नहीं मिटती। बुरहानपुर एक ऐसा ही स्थान है। यहां की भूमि की समृद्धि, यहां की चटक हरियाली और भव्य वास्तुकला से, यहां के रंगों, खुशबुओं, स्वादों और ध्वनियों की शुद्ध, सघन तीव्रता से कोई भी अभिभूत हुए बिना नहीं रह सकता। यहां सभी कुछ चमकदार बहुरंगी है और अपने आप में विशिष्ट है।
निदेशक अमित मिश्रा ने कहा कि भारतीय संस्कृति जीवन की विधि है, संस्कारों से पोषित बहुमूल्य निधि है और उन्हें गर्व है कि विदेशी विद्यार्थी भी इस पर शोध करने यहां आते हैं। प्राचार्य उज्जवल दत्ता ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराएं अपने आप में विशिष्ट हैं और वे हर किसी को अपनी ओर सहज ही आकर्षित कर लेती हैं। श्रीमती प्रतिभा पटेल ने कहा कोई भी संस्कृति जीवित नहीं रह सकती, यदि वह अपने की अन्य से पृथक रखने का प्रयास करें। अतः भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम पर आधारित है और अर्वाचीन इंडिया स्कूल द्वारा यही शिक्षा बच्चों को भी दी जाती है। सभी शोध छात्रों ने स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाओं से भी मुलाकात की। विद्यालय प्रतिनिधियों ने विदेशी अतिथियों को नगर की सांस्कृतिक धरोहरों का भ्रमण भी कराया।

संस्था के जनसंपर्क अधिकारी मिर्जा राहत बेग ने कहा कि अर्वाचीन इंडिया स्कूल में अतिथि के रूप में पधारने पर स्वागत करते हुए हर्ष व्यक्त किया।

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