पीयूष मिश्रा/अश्वनी मिश्रा की ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट
सिवनी/छपारा (मप्र), NIT;
जिले और छपारा नगर के साथ-साथ सैकड़ों ग्रामों की प्यास बुझाने वाली पवित्र बैनगंगा नदी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए ही तरस रही है। जिला प्रशासन तथा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के निकम्मे, लाचार और भ्रष्ट कार्यप्रणाली के चलते बैनगंगा नदी की सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है और हालात दिनोंदिन भयावह होते जा रहे हैं। बैनगंगा नदी का अस्तित्व खतरे में और जल संकट की आहट को लेकर पिछले फरवरी माह से ही हमने कई बार समाचार के माध्यम से जिला प्रशासन और सांसद विधायकों सहित निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया था लेकिन आज तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया जिसके चलते बैनगंगा नदी पूरी तरह सूख चुकी है और कई जगह पर तो सिर्फ और सिर्फ पानी से भरे हुए डबरे ही नजर आ रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछले फरवरी माह से ही हमने कई बार बैनगंगा नदी सूखने के कगार पर और जल संकट जैसे गंभीर मामले को लेकर लगातार समाचार के माध्यम से जिला प्रशासन का ध्यान इस गंभीर जल संकट को लेकर आकर्षित कराया था, यही नहीं सिवनी के साथ-साथ छपारा नगर और सैकड़ों ग्रामों की प्यास बुझाने वाली बैनगंगा नदी के दोनों ओर तटों पर हजारों एकड़ में मोटर पंप लगाकर बेधड़क होकर पानी चोरी करने का खेल पट्टा माफिया, विद्युत और इरीगेशन विभाग की मिलीभगत से चल रहा है, इस बात का भी खुलासा किया था लेकिन आज तक शासन प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है जिसके चलते मार्च माह से ही सिवनी नगर के साथ-साथ छपारा नगर और आसपास के सैकड़ों ग्रामों में भीषण जल संकट पैदा हो गया है और अब मई माह में स्थिति भयावह नजर आने लगी है। लोग पानी पानी के लिए मोहताज हो रहे हैं और बैनगंगा नदी पूरी तरह सूख गई है।
मुंडारा से लेकर छपारा तक सूख गई बैनगंगा
हमारी मीडिया टीम ने जब बैनगंगा नदी के उद्गम स्थल मुंडारा से लेकर छपारा तक निरीक्षण किया तो कई चौंकाने वाले दृश्य सामने आए। बैनगंगा नदी के उदगम स्थल मुंडारा से लेकर लखनवाड़ा, दिघोरी, बंडोल और छपारा तक बैनगंगा नदी के तटों पर अभी भी पट्टा माफिया विद्युत और इरीगेशन विभाग की मिलीभगत से हजारों एकड़ में बेतहाशा कब्जा करने के साथ-साथ हजारों मोटर पंप लगाकर बेधड़क पानी खींचने और चोरी करने का खेल बेखौफ जारी है। जिसके चलते बैनगंगा नदी पूरी तरह सूख गई है और कहीं-कहीं तो सिर्फ नालियों और डबरो की शक्ल में ही पानी बचा हुआ है। सबसे ज्यादा खराब हालात छपारा के ऐतिहासिक कर्बला और धड़धड़ा घाट से लेकर सिद्ध बाबा शिव मंदिर घाट तथा रेस्ट हाउस घाट के साथ साथ छोटे और बड़े पुल तथा फोरलेन बाईपास के पुल के आगे माहलनवडा मे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता हैं जहां बैनगंगा नदी के दोनों तटों और अब तो वैनगंगा नदी के सीने के ऊपर ही जुताई, बखरौनी और बोनी करने के साथ-साथ हजारों की संख्या में मोटर पंप लगाकर पानी खींचने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
