अशफाक कायमखानी, जयपुर, NIT;
राजस्थान में लाल टापू के तौर पर पहचाने जाने वाले सीकर में किसानसभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पुर्व विधायक अमरा राम की अगुवाई में बिजली दरों में बेतहाशा बढोतरी को लेकर पहले अनाज मंडी प्रांगण में विशाल सभा करके सरकार को ललकारा फिर जिला कलेक्ट्रेट पर भारी भीड़ के साथ अमराराम ने पहुंचकर पड़ाव डाला कि जिला कलेक्टर खुद बाहर आकर सभा स्थल से मांगों का ज्ञापन लेकर जायें।
अनाजमंडी में सभा करके जिला कलेक्ट्रेट के सामने पड़ाव डालने के बाद काफी समय तक कलेक्टर के बाहर आकर ज्ञापन लेने में किसानों व प्रशासन के मध्य कश्मकश चली। लेकिन आखिरकार जिला कलेक्टर बाहर सड़क पर आकर किसान सभा से ज्ञापन लेने के बाद किसान अपने घरों को लौट गये।
हालांकि किसानों की वीसीआर भरने व बिजली दरों में भारी बढोतरी को लेकर पिछले कुछ महीनों से किसानों में सरकार के प्रति भारी व्याप्त आक्रोश को भांप कर सीकर जिले के वामपंथियों ने किसानों के मध्य रहकर बिजली बिल जमा नहीं कराने व सरकार का इस मुद्दे पर विरोध करने के लिये जेहनशाजी करके अपने साथ लेकर बडा आंदोलन करने को तैयार करके आज करीब बीस हजार किसानों को सीकर में जमा करके सरकार की चुल्हे हिलाने का संकेत दे दिया है। आज के वामपंथियों के कार्यक्रम में सबसे अधिक भीड़ दांतारामगढ, धोद व लक्ष्मण गढ विधान सभा क्षेत्र की अधिक देखी जाने से लगता है कि अगर यह आंदोलन इसी तरह अगले कुछ महीनों तक यूं ही चलता रहा और सरकार इनके सामने नहीं झुकी तो इन तीनों क्षेत्रों पर वामपंथियों के विधायक बनने की संभावना काफी बढ जायेगी।
वामपंथियों के सीकर में आज हुये कार्यक्रम में मिले एक किसान ने बताया कि उनके कुएं का बिल पहले सात हजार दो सौ का आता था वो अब बारह हजार तीन सौ का आया है। दुसरे एक किसान ने कहा कि हालांकि उसने अभी तक वामपंथियों को वोट नहीं दिया है लेकिन अब सोचने पर मजबूर हो गया है कि जब इनका एक विधायक अमराराम ही होता था तो वो किसान हितों के लिये विधान सभा के अंदर व बाहर करता था। लेकिन अब अहसास हो रहा है कि वामपंथी विधायक न होने से हमेंआज यह दिन देखने पड़ रहे हैं।
कुल मिलाकर यह है कि माकपा के अमराराम व पेमाराम जैसे विधानसभा में गरजने वाले विधायकों के चुनाव हारने पर पिछले दिनों प्रशासन द्वारा कुचलने के साथ छात्रसंघ चुनावों में कमजोर होने से इनको सियासी समीक्षक काफी कमजोर मानने लगे थे लेकिन आज के कार्यक्रम में बडी तादात में अपने पुराने बेस किसानों को शहर में जमा करने के बाद सियासी समीक्षक इनकी जड़े वापस हरा होना मान रहे हैं। अब जनता इनके अगले कदम के तौर पर जयपुर में डेरा डालने की घोषणा के अमल पर होने वाली सफलता या असफला को देख रहे हैं।
