ज़फ़र खान, अकोट/अकोला (महाराष्ट्र), NIT:
पॉक्सो अधिनियम से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने संतोष रंगराव घोटेकर को बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है। हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को अपील के अंतिम निर्णय तक स्थगित करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति वाय. जी. खोब्रागड़े की एकलपीठ ने 2 नवंबर 2026 को क्रिमिनल अपील क्रमांक 435/2026 से संबंधित आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
दरअसल, यवतमाल जिले के कलंब पुलिस थाने में वर्ष 2020 में अपराध क्रमांक 317/2020 दर्ज किया गया था। इस मामले में विशेष न्यायालय, यवतमाल ने 18 अगस्त 2026 को संतोष घोटेकर को पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।
बचाव पक्ष ने रखीं महत्वपूर्ण दलीलें
आवेदक की ओर से अधिवक्ता मीर नगमान अली ने न्यायालय में पैरवी करते हुए दलील दी कि संतोष घोटेकर पूरे विचारण के दौरान जमानत पर थे और उन्होंने कभी भी जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया। बचाव पक्ष ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में महत्वपूर्ण विरोधाभास और त्रुटियां होने का तर्क भी न्यायालय के समक्ष रखा।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करने के बाद हाई कोर्ट ने सजा को अपील के अंतिम निर्णय तक स्थगित करने तथा आवेदक को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहाई के निर्देश
न्यायालय ने 25 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा समान राशि के दो सक्षम जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहाई का आदेश दिया है। इसके साथ ही आवेदक को अपने और दो निकट संबंधियों के मोबाइल नंबर न्यायालय में प्रस्तुत करने तथा पीड़िता या अभियोजन पक्ष के गवाहों को किसी भी प्रकार की धमकी नहीं देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस मामले में आवेदक की ओर से अधिवक्ता मीर नगमान अली ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक ए. जे. गोहोकर तथा पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता निकिता शाहू ने न्यायालय में अपना पक्ष रखा।
फिलहाल हाई कोर्ट ने अपील के अंतिम निर्णय तक सजा स्थगित करते हुए संतोष घोटेकर को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। मामले में अपील पर अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।
