जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली में पार्टी की ओर से आयोजित राष्ट्रीय महारैली में शामिल नहीं होने वाले 60 पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर इन पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई से प्रदेश कांग्रेस संगठन में हलचल मच गई है।
पार्टी नेतृत्व का यह कदम उन पदाधिकारियों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है, जो संगठन में जिम्मेदारी मिलने के बावजूद सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे थे। नेतृत्व का मानना है कि संगठन में पद केवल प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच रहकर जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है।
संगठन में अनुशासन पर जोर, निष्क्रिय पदाधिकारियों को चेतावनी
संगठन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कांग्रेस में अब केवल पद लेकर बैठे रहने की प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो पदाधिकारी पार्टी के कार्यक्रमों, आंदोलनों और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी नहीं करेंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
पार्टी का मानना है कि संगठन को मजबूत बनाने के लिए पदाधिकारियों का जमीनी स्तर पर सक्रिय रहना जरूरी है। नेतृत्व के निर्देशों का पालन करने और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर संघर्ष करने वालों को ही संगठन में प्राथमिकता दी जाएगी।
इन पदों पर हुई कार्रवाई
दिल्ली महारैली में शामिल नहीं होने वाले जिन 60 पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें शामिल हैं—
- 9 जिला अध्यक्ष
- 5 उपाध्यक्ष
- 14 महासचिव
- 32 सचिव
संगठन में कसावट की तैयारी, सक्रिय कार्यकर्ताओं को मिलेगा मौका
9 जिला अध्यक्षों सहित 60 पदाधिकारियों के निलंबन को मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक अनुशासन मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इस कार्रवाई के जरिए नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन में पदाधिकारियों का मूल्यांकन उनकी सक्रियता और कार्यक्षमता के आधार पर किया जाएगा।
पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि इस कदम से संगठन में सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं को आगे आने का अवसर मिलेगा। नेतृत्व का संदेश साफ है कि संगठन में पद की जिम्मेदारी निभानी होगी और पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
