मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

बुरहानपुर नगर निगम महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती शहनाज़ इस्माइल अंसारी की कम मतों के अंतर से हुई हार को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है। सोशल मीडिया पर इस हार के लिए एआईएमआईएम (एमआईएम) को ज़िम्मेदार ठहराते हुए पार्टी नेताओं से जवाब मांगने की आवाज़ उठ रही है। इसी सिलसिले में खानकाह वार्ड पार्षद प्रतिनिधि एवं शाह चमन वली सामाजिक संगठन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सैयद इसहाक अली ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से विचार व्यक्त करते हुए एआईएमआईएम नेता एवं औरंगाबाद के पूर्व सांसद इम्तियाज़ जलील को खुलदाबाद और बुरहानपुर के चुनावी नतीजों के संदर्भ में जवाब देने की चुनौती दी है।

सैयद इसहाक अली ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया है कि खुलदाबाद में कांग्रेस प्रत्याशी आमिर पटेल अपनी ताकत के दम पर चुनाव जीत गए, जिसके बाद इम्तियाज़ जलील मंच से माफ़ी मांगने की बात कर रहे हैं। लेकिन उन्हें बुरहानपुर आकर यह भी देखना चाहिए कि उनके तथा सांसद एवं पार्टी प्रमुख बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी के राजनीतिक फैसलों का यहां क्या असर हुआ? उन्होंने कहा कि बुरहानपुर में कांग्रेस की मजबूत महापौर प्रत्याशी श्रीमती शहनाज़ इस्माइल अंसारी मात्र 350 से 400 मतों के अंतर से चुनाव हार गईं और महापौर की कुर्सी भाजपा के खाते में चली गई।

यहां उल्लेखनीय है कि बुरहानपुर में एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी की आमसभा के बाद बने सियासी माहौल में एमआईएम को लगभग 11 हजार वोट मिले। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी की लगभग 350 से 400 मतों के अंतर से हुई हार के बाद एमआईएम की राजनीतिक भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब एमआईएम नेता एवं पूर्व सांसद इम्तियाज़ जलील के सोशल मीडिया पर आए बयान के बाद यह बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है।

सैयद इसहाक अली ने एआईएमआईएम के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद इम्तियाज़ जलील से दो टूक सवाल करते हुए कहा कि खुलदाबाद में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत के बाद माफ़ी मांगकर दरियादिली दिखाना आसान है, लेकिन बुरहानपुर में जिस फैसले से भाजपा को सीधा राजनीतिक लाभ पहुंचा, उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने चुनौतीपूर्ण लहजे में कहा कि यदि राजनीतिक ईमानदारी और ज़मीर में सच्चाई बाकी है, तो दोहरे राजनीतिक मापदंड छोड़कर बुरहानपुर आइए और यहां की अवाम तथा श्रीमती शहनाज़ इस्माइल अंसारी के सामने हाथ जोड़कर स्वीकार कीजिए कि बुरहानपुर में लिया गया हमारा फैसला गलत था।

सैयद इसहाक अली की इस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बुरहानपुर के राजनीतिक हलकों में एमआईएम की चुनावी भूमिका, मुस्लिम मतों के बंटवारे और कांग्रेस की हार के कारणों को लेकर चर्चा फिर तेज़ होने के संकेत हैं। पार्षद प्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता सैयद इसहाक अली ने अपने विचार सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक किए हैं।

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