मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश में कोटवारों का आक्रोश अब खुलकर सड़कों पर नजर आने लगा है। ‘म.प्र. आजाद कोटवार कर्मचारी संघ’ के बैनर तले प्रदेशभर के कोटवारों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जुन्नारदेव एवं छिंदवाड़ा जिले सहित प्रदेशभर के हजारों कोटवार भोपाल पहुंचकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद, तय कार्यक्रम के अनुसार 31 अक्टूबर 2026 से भोपाल में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया गया है। कोटवारों ने अपनी मांगों के समर्थन में राजधानी में आंदोलन शुरू कर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।
क्या हैं कोटवारों की प्रमुख मांगें?
संघ की ओर से जारी मांग पत्र के अनुसार शासन-प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गई हैं:
- स्थायी शासकीय कर्मचारी का दर्जा: प्रदेश के सभी 38 हजार कोटवारों को नियमित कर स्थायी शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए।
- भूमि स्वामी अधिकार: सेवाभूमि/मालगुजार भूमि का भूमिस्वामी अधिकार कोटवारों के नाम दर्ज किया जाए।
- सीधे मानदेय का भुगतान: मानदेय का भुगतान पूर्व की भांति सीधे कोटवारों के बैंक खातों में किया जाए।
- वर्दी वितरण में अनियमितताओं की जांच: कोटवारों को वितरित की गई घटिया गुणवत्ता की वर्दी के मामले की उच्चस्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
काली पट्टी से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह तक का सफर
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि मांगों के निराकरण के लिए आंदोलन के पहले चरण में कोटवारों ने काली पट्टी बांधकर शासकीय कार्यों का संपादन किया तथा जिला स्तर पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे। छिंदवाड़ा में जिला कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपकर शांतिपूर्ण धरना, सत्याग्रह और माइक के उपयोग की विधिवत अनुमति मांगी गई थी।
स्थानीय स्तर पर मांगों का समाधान नहीं होने के कारण कोटवारों ने अब राजधानी भोपाल का रुख किया है और 31 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू कर दिया है। कोटवारों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
