मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

पहाड़ का सीना चीरकर ग्रामीणों ने बना डाली 4 किलोमीटर सड़क, प्रशासन की बेरुखी के बीच जनसहयोग और श्रमदान की मिसाल | New India Times

दमुआ क्षेत्र के अंतर्गत गोप पंचायत के मजरे जामुन डोंगा में आजादी के दशकों बाद भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव है। शासन-प्रशासन से सड़क निर्माण की उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीणों ने आखिरकार खुद अपनी तकदीर लिखने का फैसला किया। जनसहयोग और श्रमदान के दम पर ग्रामीणों ने 10 से 20 अक्टूबर के बीच दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र को काटकर 4 किलोमीटर लंबा कच्चा सड़क मार्ग तैयार कर दिया। ग्रामीणों की यह पहल जनएकता, इच्छाशक्ति और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है।

सड़क के अभाव में दांव पर लगी थी जिंदगी

इस सड़क के निर्माण के पीछे एक दर्दनाक घटना जुड़ी है। इसी साल 19-20 अगस्त को जामुन डोंगा बस्ती की एक गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने पर सड़क के अभाव में गंभीर संकट खड़ा हो गया था। बारिश के बीच परिजनों और ग्रामीणों ने खाट या डोली के सहारे उबड़-खाबड़ रास्तों से किसी तरह महिला को गोप मुख्यालय के पास मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद छिंदवाड़ा जिला चिकित्सालय में लंबे इलाज के बाद उसकी जान बच पाई।

इस घटना ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया। इसके बाद गांव की चौपाल पर बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब सड़क के लिए और इंतजार नहीं किया जाएगा, बल्कि ग्रामीण स्वयं इसके निर्माण की पहल करेंगे।

जनसहयोग और इच्छाशक्ति की अनोखी मिसाल

गांव की सरपंच सियावती नर्रे के पति कंचन शाह नर्रे के साथ बुजुर्गों मंतरलाल मलगाम, सुपाल नर्रे, प्यारे लाल मलगाम, चन्दर लाल विश्वकर्मा, पंचम नर्रे, मंजुलाल नर्रे, रसलाल करमालशाह, किसलाल, ज्ञानलाल और सेहनु नर्रे सहित युवाओं एवं महिलाओं अनिल मलगाम, श्यामलाल नर्रे, मंगलवती, रेखा और सुरतिया नर्रे समेत पूरी बस्ती के लोगों ने इस कार्य में सहयोग किया।

आर्थिक सहयोग: ग्रामीणों ने घर-घर से चंदा एकत्रित कर मशीन के डीजल और औजारों का खर्च उठाया।

कठिन परिश्रम: 10 अक्टूबर से ‘टू टेन मशीन’ (पोकलेन/जेसीबी जैसी मशीन) की मदद से पहाड़ के दुर्गम हिस्सों को काटने का काम शुरू किया गया।

श्रमदान: मशीन के साथ-साथ ग्रामीणों ने फावड़े, कुदाल और टांगी उठाकर पत्थर तोड़ने तथा रास्ता बनाने में अपना योगदान दिया।

10 दिनों में तैयार हुआ मार्ग: ग्रामीणों के अथक परिश्रम और सामूहिक प्रयासों से 4 किलोमीटर लंबा कच्चा सड़क मार्ग तैयार हो गया।

इस मार्ग के बनने से 120 घरों और लगभग 750 की आबादी वाले इस मजरे के लोगों के लिए गोप मुख्यालय तक पहुंचना आसान हो गया है। अब बुजुर्गों, बीमारों और गर्भवती महिलाओं को मुख्य सड़क तक लाने में काफी सहूलियत मिलेगी।

ग्रामीणों की मांग—पक्की सड़क, नालियां और रिटेनिंग वॉल का हो निर्माण

चार किलोमीटर का कठिन रास्ता ग्रामीणों ने अपने पसीने और एकजुटता से तैयार कर लिया है, लेकिन अब उन्हें इस मार्ग के टिकाऊ रहने की चिंता सता रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि कच्चे मार्ग के दोनों ओर पक्की नालियों और पहाड़ी की तरफ मजबूत रिटेनिंग वॉल (सुरक्षात्मक दीवार) का निर्माण बेहद जरूरी है। यदि समय रहते यह व्यवस्था नहीं की गई, तो बारिश के दौरान सड़क के क्षतिग्रस्त होने और ग्रामीणों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा बना रहेगा।

मांग पूरी नहीं हुई तो चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि चुनाव से पहले शासन-प्रशासन ने सड़क को पक्का करने तथा नालियों और सुरक्षात्मक दीवार के निर्माण में सहयोग नहीं किया, तो वे आगामी चुनाव का बहिष्कार करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

जामुन डोंगा के ग्रामीणों ने अपने सामूहिक प्रयासों से साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और एकजुटता के बल पर कठिन से कठिन चुनौती का सामना किया जा सकता है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन ग्रामीणों की इस प्रेरणादायक पहल पर कब संज्ञान लेता है और उन्हें स्थायी सड़क की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाता है।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version