संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ, ग्वालियर (मप्र), NIT:

21वें आईटीएम उद्भव उत्सव इंटरनेशनल कल्चरल ओलंपियाड के दूसरे दिन आईटीएम यूनिवर्सिटी में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारतीय पौराणिक कथाओं, आध्यात्मिक आस्था और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिला। विभिन्न कॉलेजों और संस्थानों के लगभग 450 विद्यार्थियों ने क्लासिकल और सेमी-क्लासिकल नृत्य की 28 प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान से आए कलाकारों ने भी अपनी सांस्कृतिक परंपराओं की झलक प्रस्तुत की। कहीं मां दुर्गा और मां काली की महिमा का बखान हुआ, तो कहीं महिषासुर मर्दन की गाथा, भगवान शिव के तेज और श्रीकृष्ण की लीलाओं को नृत्य के माध्यम से जीवंत किया गया। पूरा सभागार तालियों और महाकाल के जयकारों से गूंज उठा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मंगोलिया के राजदूत श्री उलजीत लवसेनजात उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिमालयन कल्चर इंटरनेशनल स्कूल के अध्यक्ष डॉ. एलपी पोटसंग ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में आईटीएम यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार श्री अनिल माथुर मौजूद रहे। इस अवसर पर उद्भव संस्था के अध्यक्ष डॉ. केशव पाण्डेय और सचिव श्री दीपक तोमर भी उपस्थित रहे।

विद्यार्थियों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों, आकर्षक वेशभूषा और नृत्य की सजीव अभिव्यक्ति ने भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को मंच पर उतारा। प्रस्तुतियों के बाद संस्था के पदाधिकारियों और वरिष्ठ सदस्यों ने टीम लीडरों को स्मृति चिह्न भेंट किए।
अगले दिन के आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल डी.के. त्रिपाठी शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध नृत्यांगना पद्मश्री डॉ. नलिनी एवं डॉ. कमलिनी करेंगी।
नृत्य में दिखे देवी के स्वरूप, शिव महिमा और कृष्ण की लीलाएं
डेली कॉलेज, इंदौर के विद्यार्थियों ने नाट्य और नृत्य के माध्यम से मां दुर्गा और मां काली के विभिन्न स्वरूपों तथा उनकी महिमा का प्रदर्शन किया। वहीं, केडीबी पब्लिक स्कूल, गाजियाबाद के विद्यार्थियों ने रुद्राक्ष की उत्पत्ति और भगवान शिव की महिमा पर आधारित प्रस्तुति से दर्शकों को आकर्षित किया।
प्रेलुद, आगरा के बच्चों ने ‘गोविंद बोलो हरि गोपाल’ भजन पर भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की गाथा प्रस्तुत की। नृत्यसंगम एमआईटीएस के विद्यार्थियों ने सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग के विभिन्न पहलुओं को मंच पर साकार किया। प्रस्तुति में भगवान राम के माध्यम से सत्य की विजय, राधा-कृष्ण की लीलाएं, श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप और गीता के उपदेश दर्शाए गए। वहीं, कलियुग के चित्रण के माध्यम से बढ़ते स्वार्थ और प्रकृति को हो रहे नुकसान के प्रति चिंता व्यक्त की गई।
शिखा शाइन डांस अकादमी के कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की रासलीलाओं पर आधारित प्रस्तुति दी। इन प्रस्तुतियों ने भारतीय आध्यात्मिक विरासत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संस्कृतियों की विविधता को भी मंच पर उकेरा।
लोकनृत्यों में दिखी जनजातीय परंपरा और मां भवानी की भक्ति
कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन, अमरकंटक के विद्यार्थियों ने संबलपुरी लोकनृत्य के माध्यम से जनजातीय जीवनशैली और लोक संस्कृति की झलक दिखाई। वहीं, संस्कृति द गुरुकुल, गुवाहाटी के कलाकारों ने लोकनृत्य के जरिए क्षेत्रीय परंपराओं का चित्रण किया और मां भवानी की भक्ति एवं आराधना को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया।
डीपीएस ग्वालियर के विद्यार्थियों ने चंबल क्षेत्र में मां भवानी की भक्ति से जुड़ी लोक परंपरा लांगुरिया को ‘मेरो खोय गयो बाजूबंद लंगुरियो मंदिर में’ गीत पर प्रस्तुत कर समां बांध दिया। डेली कॉलेज, इंदौर के विद्यार्थियों ने महाराष्ट्र में मां दुर्गा भवानी की आराधना की परंपरा को नृत्य के माध्यम से दर्शाया। वहीं, डीपीएस इंटरनेशनल, गुरुग्राम के विद्यार्थियों ने ग्रामीण परिवेश और शेर की कहानी पर आधारित आकर्षक प्रस्तुति दी। लोकनृत्यों के जरिए देश के अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं, आस्था और जीवनशैली की विविधतापूर्ण झलक देखने को मिली।
उद्भव एमयूएन में रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर एआई तक पर चर्चा
उत्सव के अंतर्गत आयोजित उद्भव एमयूएन (मॉडल यूनाइटेड नेशंस) में भारत के विभिन्न राज्यों और विदेशों से आए विद्यार्थियों ने वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर अपने विचार रखे। चर्चा के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ अमेरिका, ईरान, इजरायल और फिलिस्तीन से जुड़े संघर्षों जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मंथन किया गया।
विद्यार्थियों ने वैश्विक महामारी जैसी चुनौतियों से निपटने, अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दुरुपयोग को रोकने के उपायों पर भी सुझाव दिए। इस गतिविधि ने विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय संबंधों, कूटनीति और वैश्विक समस्याओं को समझने तथा तार्किक ढंग से अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर दिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ वैचारिक विमर्श ने उत्सव को कला, संस्कृति और वैश्विक जागरूकता का साझा मंच बना दिया।
सोमवार को सोलो डांस और फाइनल ग्रुप डांस का आयोजन
सोमवार को सुबह 9 बजे सोलो डांस की प्रस्तुतियां होंगी, जबकि शाम 5 बजे फाइनल ग्रुप डांस प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
शानदार प्रस्तुतियों के चलते सभी ग्रुप फाइनल राउंड में पहुंचे
प्रतिभागी समूहों द्वारा प्रस्तुत 28 शानदार प्रस्तुतियों को देखकर निर्णायक मंडल के सदस्य प्रो. देवयानी चटर्जी, श्रीमती अनु मिश्रा, वाणी माधव, श्री बाल कृष्ण मराठ, श्री धीरज कुमार पाण्डेय और लावण्या आप्टे भी प्रभावित हुए। प्रस्तुतियों का स्तर इतना अच्छा रहा कि प्रथम और द्वितीय स्थान के चयन में निर्णायकों को कठिनाई हुई। इसके चलते सभी समूहों को फाइनल राउंड में भेजने का निर्णय लिया गया।
