ओमप्रकाश सोनी, अनूपपुर, (मप्र), NIT:
बारिश का मौसम समाप्त होते ही अनूपपुर जिले में रेत के कथित अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। जिले के कचरा घाट, हर्री, बहेराबांध, सेंदुरी, भगत बांध, निगवानी के पचखुरा, बसखला, बर्री और जैतहरी क्षेत्र के बरघाट सहित विभिन्न स्थानों से रेत के अवैध कारोबार की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर उठ रहे इन सवालों ने खनिज विभाग और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
बताया जा रहा है कि रात होते ही रेत के कथित अवैध कारोबार में शामिल लोग सक्रिय हो जाते हैं और अंधेरे का फायदा उठाकर नदियों से रेत निकालने तथा उसका परिवहन करने का सिलसिला सुबह तक चलता रहता है। यदि इन शिकायतों में सच्चाई है, तो यह केवल प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन का मामला नहीं, बल्कि संबंधित विभागों की निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता की भी परीक्षा है।
नदियों के सीने पर चोट, जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय होगी?
जिले की नदियां क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा हैं। इनके जलप्रवाह और नदी तल के साथ छेड़छाड़ का असर पर्यावरण, नदी के पारिस्थितिकी तंत्र और आसपास के क्षेत्रों पर पड़ सकता है। ऐसे में यदि निर्धारित नियमों के विरुद्ध रेत का उत्खनन हो रहा है, तो उसे रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में रेत के उत्खनन और परिवहन पर निगरानी रखने के लिए खनिज विभाग तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस मौजूद है, तो फिर अवैध कारोबार की शिकायतें लगातार क्यों सामने आ रही हैं? क्या संबंधित क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण किया जा रहा है? क्या रात के समय संवेदनशील घाटों पर गश्त और जांच की जाती है? यदि कार्रवाई होती है, तो उसका विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
क्या रेत कारोबारियों का नेटवर्क निगरानी व्यवस्था पर भारी?
स्थानीय स्तर पर उठ रहे आरोपों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि आखिर कथित अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही है। क्या विभागों को पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही है, क्या निगरानी में कोई कमी है या फिर कार्रवाई के बावजूद कारोबार दोबारा शुरू हो जाता है?
इन सवालों के जवाब अनुमान से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर मिलने चाहिए। यदि किसी स्थान पर अवैध उत्खनन हो रहा है, तो वहां की जांच, जब्ती, दर्ज प्रकरणों और की गई कार्रवाई का ब्योरा सामने आना चाहिए। वहीं, यदि विभाग ने प्रभावी कार्रवाई की है, तो उसका विवरण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।
खनिज विभाग से सीधे सवाल
- जिले के चिह्नित घाटों और संवेदनशील क्षेत्रों में पिछले कुछ महीनों के दौरान कितने निरीक्षण किए गए?
- अवैध उत्खनन और परिवहन के कितने मामले दर्ज किए गए तथा कितने वाहन जब्त किए गए?
- रात के समय रेत के अवैध परिवहन को रोकने के लिए क्या विशेष निगरानी व्यवस्था की गई है?
- कचरा घाट से बरघाट तक सामने आ रही शिकायतों की जांच कब की जाएगी?
- क्या संबंधित क्षेत्रों का संयुक्त निरीक्षण कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी?
अब जवाबदेही से नहीं चलेगा काम
अनूपपुर जिले में रेत के कथित अवैध कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब केवल औपचारिक कार्रवाई से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों से मिलना चाहिए। प्रशासन को शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और जहां अवैध उत्खनन प्रमाणित हो, वहां नियमानुसार कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
सवाल सीधा है—यदि नदी से अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है, तो उसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? और यदि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई कर रहे हैं, तो उसका स्पष्ट और पारदर्शी विवरण जनता के सामने क्यों नहीं रखा जाता?
नदियों की प्राकृतिक संपदा की रक्षा करना और कानून का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद संबंधित विभाग जांच और कार्रवाई करते हैं या जिले की नदियों से रेत निकाले जाने का कथित सिलसिला यूं ही जारी रहता है।
