मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा में स्थित टोंक के रुबातों (धर्मशालाओं) की देखरेख से जुड़े नाज़िर मुवफ्फक़ फरीद देहलवी एक दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे। अपने दौरे के दौरान उन्होंने टोंक और जयपुर में विभिन्न धार्मिक, ऐतिहासिक एवं शैक्षणिक स्थलों का अवलोकन किया। पूरे दौरे में टोंक रुबात के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता साहबज़ादा राहिल खान उनके साथ रहे। दौरे के उद्देश्य के तहत उन्होंने टोंक स्थित रुबातों के स्थानीय कार्यालय पहुंचकर वहां की विभिन्न गतिविधियों की बारीकी से जानकारी प्राप्त की और हज यात्रियों से मुलाकात कर उनके अनुभव एवं फीडबैक भी जाना।
उल्लेखनीय है कि मुवफ्फक़ फरीद देहलवी वक्फ़ खलीलुज़्ज़मानी, वक्फ़ उस्मान साहब तथा वक्फ़ सैयद अहमद हबीब से संबंधित रुबातों के नाज़िर हैं। ये रुबात मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा में स्थित हैं तथा हज यात्रियों को धार्मिक एवं आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिहाज़ से विशेष महत्त्व रखते हैं। भारत से पवित्र हज यात्रा पर जाने वाले हाजियों को ये सुविधाएं निःशुल्क प्रदान की जाती हैं।
उन्होंने टोंक की ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद में नमाज़-ए-जुमा अदा की और ईदगाह का भी अवलोकन किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने टोंक स्थित अरबी-फ़ारसी इंस्टीट्यूट का दौरा कर इस ऐतिहासिक शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान की गतिविधियों और उपलब्धियों के बारे में जानकारी हासिल की। इस अवसर पर उन्होंने टोंक में मौजूद विशाल कुरआन-ए-पाक का भी अवलोकन किया, जो शहर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
अपने दौरे के दौरान उन्होंने स्थानीय हाजियों से मुलाकात कर हज यात्रा तथा रुबातों से संबंधित उनके अनुभवों और सुझावों को जाना। हाजियों से संवाद का उद्देश्य उनकी आवश्यकताओं, सुविधाओं और अनुभवों को समझना था, ताकि भविष्य में हज सेवाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में उपयोगी पहल की जा सके।
मुवफ्फक़ फरीद देहलवी ने टोंक रुबात के कार्यालय में भविष्य में भी नियमित रूप से आने और प्रतिवर्ष दौरा करने का आश्वासन दिया। उनके इस आश्वासन को स्थानीय स्तर पर रुबातों से जुड़े कार्यों, हाजियों के साथ संवाद और आपसी संपर्क को मजबूत बनाने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
टोंक के बाद जयपुर पहुंचने पर उन्होंने टोंक रुबात से जुड़े अमानत अली खान, मोहम्मद रफ़ीक खान, आदिल खान और शहनवाज़ खान से भी सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय हाजियों से भी संवाद किया। अपने संक्षिप्त प्रवास के दौरान विभिन्न मुलाकातों और निरीक्षण के बाद मुवफ्फक़ फरीद देहलवी रात्रिकालीन विमान सेवा से वापस रवाना हो गए।
मुवफ्फक़ फरीद देहलवी का यह दौरा टोंक की धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत से परिचित होने, रुबातों के स्थानीय कार्यालय से संपर्क मजबूत करने और हज यात्रियों के अनुभवों को समझने के लिहाज़ से महत्त्वपूर्ण रहा। टोंक और जयपुर में हुई मुलाकातों से स्थानीय लोगों तथा हज सेवाओं से जुड़े व्यक्तियों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।
