ज़फ़र खान, अकोट/अकोला (महाराष्ट्र), NIT:
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने यवतमाल जिले के खंडाला पुलिस थाने में दर्ज मामले में इसापुर बांध, तहसील पुसद निवासी शेख जुनैद शेख रहमतुल्ला और शेख एराज शेख रहमतुल्ला को अग्रिम जमानत प्रदान की।
न्यायमूर्ति वाई. जी. खोब्रागड़े ने आपराधिक अपील क्रमांक 504/2026 स्वीकार करते हुए पुसद के सत्र न्यायालय द्वारा 4 सितंबर 2026 को अग्रिम जमानत खारिज करने के पारित आदेश को निरस्त कर दिया।
मामला 25 जून 2026 को खेत की मेड़ पर लगे सीमेंट के खंभे हटाने को लेकर हुए कथित विवाद से संबंधित है। शिकायत में जातिसूचक गाली-गलौज करने, मारपीट का प्रयास करने और धमकी देने के आरोप लगाए गए थे। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(वीए) के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
अग्रिम जमानत पर विचार करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी में सामूहिक रूप से जातिसूचक गाली देने का सामान्य आरोप लगाया गया है, लेकिन कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए विशिष्ट जातिसूचक शब्दों का उल्लेख नहीं है। न्यायालय ने यह भी संज्ञान लिया कि पक्षकारों के बीच खेत की सीमा को लेकर विवाद था। प्राथमिकी से प्रथमदृष्टया यह स्पष्ट नहीं होने के कारण कि कथित जातिसूचक गाली-गलौज सार्वजनिक दृष्टि में हुई थी, न्यायालय ने इस मामले में अधिनियम की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत पर लागू प्रतिबंध को लागू नहीं माना।
न्यायालय ने निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में दोनों आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और इतनी ही राशि के दो-दो सक्षम जमानतदारों के साथ रिहा किया जाए। दोनों आरोपियों को दो महीने तक प्रत्येक सोमवार सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित रहने, निचली अदालत में नियमित रूप से हाजिरी लगाने और अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित नहीं करने की शर्तें लगाई गई हैं।
अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता एम. एन. अली, राज्य की ओर से अतिरिक्त सरकारी अभियोक्ता एच. एस. धांडे तथा शिकायतकर्ता की ओर से नियुक्त अधिवक्ता एस. आर. सयारे उपस्थित हुए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां केवल अग्रिम जमानत के निर्णय तक सीमित हैं और मूल आपराधिक मामला अभी लंबित है।
