अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:
मध्यप्रदेश में वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ने से अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में रोजाना करीब 3 हजार मरीज वायरल फीवर से संबंधित समस्याओं के चलते इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, भोपाल में प्रतिदिन करीब 600, इंदौर और जबलपुर में लगभग 500-500 मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। वहीं, ग्वालियर में करीब 200 और उज्जैन में लगभग 150 मरीज रोजाना वायरल फीवर से परेशान बताए जा रहे हैं।
तुरंत राहत के लिए दवाओं का सेवन पड़ सकता है भारी
बुखार और शरीर में दर्द से जल्द राहत पाने के लिए कुछ लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के पेनकिलर और एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन कर रहे हैं। डॉक्टरों ने इस प्रवृत्ति को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दर्द निवारक दवाओं का गलत या लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं, बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से दवाओं के प्रति बैक्टीरिया में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने का खतरा रहता है।
गूगल और सोशल मीडिया देखकर इलाज करना भी जोखिम भरा
आजकल कई लोग बीमारी के लक्षण इंटरनेट और सोशल मीडिया पर खोजकर खुद ही दवाएं लेने लगते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, एक जैसे लक्षणों के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। ऐसे में बिना जांच के दवा लेना बीमारी को बढ़ा सकता है और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा कर सकता है।
डॉक्टरों की सलाह
चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न लें और पेनकिलर का लगातार या अनियंत्रित इस्तेमाल करने से बचें। बुखार या दर्द लंबे समय तक बना रहे, लक्षण गंभीर हों अथवा हालत बिगड़ रही हो तो समय पर चिकित्सकीय जांच कराएं। वायरल फीवर के दौरान पर्याप्त आराम, पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें तथा जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से उचित उपचार लें।
