मक़सूद अली, ब्यूरो चीफ, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

चुनाव के दौरान मतदाताओं से संपर्क साधने और जीत हासिल करने के बाद उनसे दूरी बनाए रखने के आरोपों को लेकर विधान परिषद सदस्य किरण सरनाईक को लेकर यवतमाल जिले के शिक्षक मतदाताओं में नाराजगी की चर्चा है। आरोप है कि वर्ष 2020 में शिक्षक मतदाताओं के समर्थन से विधान परिषद पहुंचे सरनाईक ने अपने छह साल के कार्यकाल के दौरान जिले के शिक्षकों की समस्याओं और कर्मचारी संगठनों के मुद्दों पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई। अब वर्ष 2026 के चुनाव की पृष्ठभूमि में उनकी बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पिछले चुनाव के दौरान कथित पैठणी वितरण का मुद्दा भी चर्चा में रहा था। इस बार विरोधियों की ओर से मतदाताओं को पैसे और अन्य प्रलोभन देकर प्रभावित करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, शिक्षकों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल, बिना अनुदान वाले विद्यालयों के कर्मचारियों के वेतन और शिक्षा क्षेत्र की अन्य लंबित समस्याओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
विधायक सरनाईक के समर्थन में रविवार को यवतमाल में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की प्रचार सभा आयोजित होने की जानकारी सामने आई है। इस सभा को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। शिक्षक मतदाताओं के बीच सवाल उठ रहा है कि यदि चुनाव के समय जिले में सक्रियता दिखाई जा रही है, तो पिछले छह वर्षों के दौरान शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या प्रयास किए गए?
शिक्षक संगठनों और मतदाताओं के बीच चिकित्सा बिलों की प्रतिपूर्ति, वेतन अनुदान, कर्मचारियों की आर्थिक परेशानियों तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य मुद्दों पर कामकाज का हिसाब सामने रखने की मांग उठ रही है। अब चुनावी प्रचार और राजनीतिक सभाओं के बीच विधायक के पिछले कार्यकाल का आकलन भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधायक किरण सरनाईक इन सवालों पर क्या जवाब देते हैं और शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए अपने कार्यकाल का कौन-सा विवरण मतदाताओं के सामने रखते हैं।
