ज़फ़र खान, अकोट/अकोला (महाराष्ट्र), NIT:
67 वर्षीय वृद्ध महिला से दुष्कर्म के मामले में आरोपी योगेश शंकर आले (24 वर्ष), निवासी सामदा काशीपुर, तहसील दर्यापुर, जिला अमरावती की जमानत अर्जी अकोट स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी। 17 अक्टूबर 2026 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री बी.एम. पाटील ने यह फैसला सुनाया। आरोपी के खिलाफ दहीहांडा पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 428/2024 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 में मामला दर्ज है। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद आरोपी ने जमानत के लिए आवेदन किया था। वह वर्तमान में अकोला जेल में बंद है।
इस मामले में सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता अजित देशमुख ने आरोपी की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए लिखित जवाब पेश किया और न्यायालय के समक्ष अपनी दलीलें रखीं।
सरकारी अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि आरोपपत्र में दर्ज विवरण के अनुसार, 67 वर्षीय पीड़िता ने पुलिस स्टेशन पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता का कोई बेटा नहीं होने के कारण वह अपनी छोटी बेटी के पास रहती थी। हर साल की तरह उसकी बड़ी बेटी ईंट भट्ठे पर काम करने के लिए अपनी छोटी बहन के पास आई थी। योगेश शंकर आले भी ईंट भट्ठे पर काम करने के लिए वहां रहने आया था।
ईंट भट्ठे पर रहने की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पीड़िता की बड़ी बेटी ने अपना और योगेश आले का सामान अपनी छोटी बहन के घर पर रख दिया था।
घटना 23 नवंबर 2024 की है। सुबह करीब 9 बजे पीड़िता की दोनों बेटियां और दामाद रहने के लिए झोपड़ी बनाने के उद्देश्य से ईंट भट्ठे पर गए थे। पीड़िता का पति शराब पीने का आदी था। इसलिए उसकी बेटी काम पर जाते समय घर में ताला लगाकर पीड़िता को गायों के गोठे में चारपाई पर सुला देती थी।
घटना वाले दिन भी परिवार के सदस्य पीड़िता को गोठे में सुलाकर काम पर चले गए थे। इसी दौरान उसका छोटा दामाद दरांती लेने के लिए घर आया। वह दरांती लेकर जल्दबाजी में घर पर ताला लगाए बिना चला गया।
आरोप है कि कुछ समय बाद योगेश आले गोठे में आया और पीड़िता को चारपाई से उठाकर घर के अंदर ले गया। वहां उसने पीड़िता को जमीन पर बिछी चादर पर लिटा दिया। पीड़िता ने विरोध किया और शोर मचाने की कोशिश की, लेकिन अधिक उम्र के कारण वह आवाज नहीं निकाल पा रही थी।
आरोप के मुताबिक, इसी दौरान आरोपी ने पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध उसके साथ दुष्कर्म किया। तभी पीड़िता की दोनों बेटियां ईंट भट्ठे से वापस घर पहुंच गईं। उन्होंने आरोपी को पीड़िता के साथ जबरदस्ती करते हुए देखा। बेटियों के जोर से आवाज लगाने पर आरोपी वहां से भाग गया।
पीड़िता की शिकायत के आधार पर दहीहांडा पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
सरकारी अधिवक्ता अजित देशमुख ने न्यायालय में दलील दी कि मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। पीड़िता के साथ कथित दुष्कर्म के बाद आरोपपत्र दाखिल होने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई थी। मामले में पीड़िता का पोस्टमार्टम भी कराया गया था।
उन्होंने यह भी बताया कि घटना के बाद आरोपी करीब 18 महीने तक फरार रहा। काफी समय बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर न्यायालय के समक्ष पेश किया। जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
सरकारी अधिवक्ता ने आशंका जताई कि यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो उसके फरार होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, वह मामले के प्रत्यक्षदर्शी गवाहों पर दबाव डाल सकता है और उनके न्यायालय में बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी ने अपनी जमानत अर्जी के समर्थन में गवाहों के शपथपत्र न्यायालय में दाखिल किए हैं। ऐसे में आरोपी को जमानत मिलने पर गवाहों के मन में भय पैदा हो सकता है। इससे विवाद उत्पन्न होने और किसी अन्य गंभीर अपराध की आशंका भी बनी रह सकती है।
सरकारी अधिवक्ता ने न्यायालय से अनुरोध किया कि मामले की गंभीरता, आरोपी के लंबे समय तक फरार रहने और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका को ध्यान में रखते हुए उसकी जमानत अर्जी खारिज की जाए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अकोट के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी योगेश शंकर आले की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
