नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र में सुखे का सितम धीरे-धीरे दिखने लगा है। बारिश के अभाव से कपास सोयाबीन मकई दाल दलहन का उत्पादन शून्य पर सिमट गया। न्यू इंडिया टाइम्स ने धुलिया जिले के मिर्ची बेल्ट में घूमकर किसानों से बात की तो पता चला कि किसानों ने पानी के अभाव से इस साल मिर्ची की खेती नहीं की , जब की जिनके पास पानी का सोर्स है उन्होंने हरी मिर्च बेचकर चंद पैसे कमा लिए। लाल मिर्च के लिए मशहूर अमलनेर , शिंदखेड़ा , दोंडाईचा , नवापुर , नरडाना के हजारों एकड़ खेत इस साल मिर्च के अभाव से खाली पड़े हैं। इस बेल्ट के किसान मसालों में इस्तेमाल होने वाली बेहतरीन मिर्च का उत्पादन करते हैं।

नरडाणा के पास अब लिफ़्ट इरिगेशन योजना का काम तेज़ी से शुरू किया गया है। 2014 के बाद शहादा प्रकाशा के तापी बैरेज के बैक वॉटर से इन इलाकों में पानी लिफ़्ट किया जाता तो आज मिर्च की खेती करने वाले किसानों को सुखे से राहत मिल सकती थी। महाराष्ट्र में पड़े सुखे के लिए देवेन्द्र सरकार के जल संपदा मंत्रालय को दोषी ठहराया जा रहा है। सुखे का प्रबंधन कर रहे आपदा प्रबंधन विभाग की अनदेखी से महाराष्ट्र में सुखे की तीव्रता बढ़ती जा रही है। देवेन्द्र फडणवीस सरकार द्वारा अकाल राहत के नाम पर पांच हजार रुपए दे कर किसानों के साथ मजाक किए जाने की बात ने जनता के मन में घर कर लिया है।
शिवसेना उद्धव ठाकरे के जामनेर ब्लॉक प्रमुख एड प्रकाश पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस को मनी ऑर्डर से 101 रुपए का चंदा भेजकर सरकार के किसान विरोधी नीति का धिक्कार किया है। तर्कवादी खेमे के मुताबिक सुखा राहत पैकेज का सीधा संबंध विशेष मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR) के भविष्य पर टिका है। अगर कल सुप्रीम कोर्ट SIR को रद्द करती है तो बीजेपी शासित देवेन्द्र फड़नवीस सरकार जनता को अपने हाल पर छोड़ देगी।
दरगाह विकास कार्य की समीक्षा :
जामनेर के शाहजहाँ शाहावली बाबा दरगाह के बुनियादी विकास के लिए मंत्री गिरीश महाजन के अनुरोध पर महाराष्ट्र सरकार की ओर से एक करोड़ रुपए का फंड आबंटित किया गया है। जितेंद्र पाटिल के साथ दरगाह पहुंचे बीजेपी के पार्षदो ने सालभर से चल रहे विकास काम का जायजा लिया।
