मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
छिंदवाड़ा ज़िले में आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने वाले ‘पेसा एक्ट’ की अनदेखी सरकार और प्रशासन को भारी पड़ती नजर आ रही है। तामिया के चावलपानी में दूधी नदी पर बनने वाले प्रस्तावित बांध के खिलाफ पिछले 11 दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शनिवार, 17 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे उग्र रूप धारण कर लिया। यहाँ तीन जिलों और 107 प्रभावित गाँवों के किसानों की एक विशाल महापंचायत आयोजित की गई, जिसमें हजारों की संख्या में ग्रामीण और किसान शामिल हुए।

पेसा एक्ट के बावजूद निर्माण प्रक्रिया से उपजा आक्रोश
विरोध प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय ग्राम सभाओं द्वारा पेसा एक्ट (PESA Act) के तहत पहले ही इस बांध को पूरी तरह से नामंजूर किया जा चुका है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ाने के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। विरोध प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए मौके पर एसडीओपी सोनम पाटिल और तहसीलदार सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा।
15 नवंबर को छिंदवाड़ा में महाआंदोलन का ऐलान
महापंचायत में तीन जिलों के किसानों की उपस्थिति के बीच राष्ट्रीय क्रांति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष देव रावण भलावी और जिला अध्यक्ष प्रवीण दुर्वे विशेष रूप से मौजूद रहे। महापंचायत को संबोधित करते हुए नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों पर कुठाराघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नेताओं ने घोषणा की कि चावलपानी का धरना फिलहाल स्थगित किया जा रहा है, लेकिन लड़ाई खत्म नहीं हुई है। आंदोलन का दायरा बढ़ाते हुए 15 नवंबर को छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय में विशाल आंदोलन की तारीख का ऐलान किया गया है। 15 नवंबर को छिंदवाड़ा में बड़ी संख्या में किसान जुटेंगे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी हुंकार भरेंगे।
