शमसुद्दोहा, ब्यूरो चीफ, गोरखपुर (यूपी), NIT:
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, गोरखपुर ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति की जटिल ऑनलाइन व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन किया। परिषद के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पेंशनरों के लिए वर्तमान ऑनलाइन चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यवस्था अत्यंत जटिल है। अधिकांश पेंशनर कंप्यूटर संचालन में पूरी तरह दक्ष नहीं हैं और वर्तमान व्यवस्था भी अभी पूरी तरह सुचारू नहीं हो पाई है। ऐसे में ऑफलाइन आवेदन की व्यवस्था अनिवार्य रूप से जारी रखी जानी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में SGPGIMS की निर्धारित दरें निजी अस्पतालों में होने वाले वास्तविक चिकित्सा खर्च की तुलना में काफी कम हैं। इसलिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिलों का भुगतान SGPGIMS की दरों के बजाय निजी अस्पतालों में प्रचलित वास्तविक दरों के आधार पर किया जाना चाहिए।
इसी क्रम में मदन मुरारी, अशोक पांडे, जनमेजय पांडे और अनूप ने संयुक्त बयान जारी कर मांग की कि सेवारत कर्मचारियों और पेंशनरों के 1 अक्टूबर से पहले के सभी लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों का निस्तारण ऑफलाइन माध्यम से ही किया जाए।
उन्होंने कहा कि पेंशनरों को अचानक ऑफलाइन व्यवस्था से वंचित कर दिया गया है, जबकि वर्ष 2022 से पहले सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के पास 1 अक्टूबर से ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करने के लिए eHRMS कोड ही उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में उनके सामने आवेदन जमा करने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि 28 सितंबर 2026 को अपर मुख्य सचिव, वित्त की अध्यक्षता में आयोजित पेंशनर सलाहकार समिति की बैठक में पेंशनरों को ऑनलाइन चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल प्रस्तुत करने की अनिवार्यता से राहत देने के विषय पर चर्चा हुई थी। इसके बावजूद 8 अक्टूबर 2026 को शासनादेश जारी होने के बाद भी कर्मचारियों और पेंशनरों की व्यावहारिक कठिनाइयों का समाधान नहीं हो पाया है।
परिषद ने मांग की कि जब तक चिकित्सा प्रतिपूर्ति की नई व्यवस्था से जुड़े सभी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को पोर्टल के संचालन का पूर्ण एवं सुचारू प्रशिक्षण नहीं दिया जाता, तब तक इस व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू न किया जाए।
सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिलों से सरकार द्वारा की जा रही 10 प्रतिशत आयकर कटौती अनुचित है। उन्होंने इसे कर्मचारियों और पेंशनरों पर आर्थिक बोझ बताते हुए इस कटौती को तत्काल बंद करने की मांग की। उन्होंने यह भी मांग की कि एनपीएस से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति का लाभ दिया जाए।
इस अवसर पर मुख्य रूप से रूपेश कुमार श्रीवास्तव, मदन मुरारी, अशोक पांडे, अनूप कुमार, सौरभ श्रीवास्तव, सुभाष पांडे, जय प्रकाश, रामधनी पासवान, अनूप गुप्ता, जनमेजय पांडे, चंद्र प्रकाश, जय प्रकाश यादव, मुखदेव देव, महेंद्र प्रसाद, रवि शर्मा, रामचंद्र दूबे, विकास तिवारी सहित परिषद के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
