साबिर खान, वसई-विरार/मुंबई (महाराष्ट्र), NIT:

सनसिटी कब्रिस्तान के लोकार्पण को लेकर वारिस पठाण ने आयुक्त से की मुलाकात, जल्द अनुमति नहीं मिलने पर आंदोलन की चेतावनी | New India Times

एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक एडवोकेट वारिस पठाण के नेतृत्व में पार्टी के वसई-विरार प्रतिनिधिमंडल ने 8 अक्टूबर 2026 को वसई-विरार शहर महानगरपालिका के आयुक्त से मुलाकात की। इस दौरान सनसिटी, दीवानमान स्थित सर्वे नंबर 176 की सर्वधर्मीय दफनभूमि (कब्रिस्तान) को आम जनता के लिए खोलने और वहां अंतिम संस्कार की अनुमति देने के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में वारिस पठाण ने दफनभूमि शुरू करने में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि महानगरपालिका ने जल्द ही दफनभूमि शुरू करने की अनुमति नहीं दी, तो एआईएमआईएम स्वयं इसे शुरू करने के लिए आगे आएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगी और जरूरत पड़ने पर बड़े पैमाने पर आंदोलन एवं प्रदर्शन किया जाएगा।
वारिस पठाण ने बताया कि वसई-विरार क्षेत्र में मुस्लिम आबादी लगभग चार लाख है। वर्ष 2011 में स्थानीय नागरिकों ने दफनभूमि की मांग उठाई थी। इसके बाद सर्वेक्षण के आधार पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने छह एकड़ जमीन पर सर्वधर्मीय दफनभूमि के लिए मंजूरी दी थी। इसमें मुस्लिम, लिंगायत, ईसाई, बोहरा, आगा खानी और शिया समुदायों के लिए स्थान निर्धारित किए गए थे। इसके बावजूद वर्ष 2011 से 2026 तक दफनभूमि में अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं मिल सकी है।

सनसिटी कब्रिस्तान के लोकार्पण को लेकर वारिस पठाण ने आयुक्त से की मुलाकात, जल्द अनुमति नहीं मिलने पर आंदोलन की चेतावनी | New India Times

उन्होंने कहा कि महानगरपालिका ने दफनभूमि की सुरक्षा के लिए चार करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की थी। परिसर में सुरक्षा दीवार का निर्माण भी किया जा चुका है और प्रवेश द्वार भी लगाया गया है। इसके बावजूद दफनभूमि को शुरू करने की अनुमति नहीं दिया जाना समझ से परे है।
वारिस पठाण ने कहा कि वसई-विरार क्षेत्र में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सात से आठ किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। यह समस्या मुस्लिम, ईसाई और लिंगायत सहित विभिन्न समुदायों के लोगों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले जमीन के वेटलैंड यानी पाणथल क्षेत्र में होने का मुद्दा उठाया जाता था, लेकिन अब इस आधार पर मामले को लंबित रखना उचित नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति के विरोध के कारण पूरे मामले को वर्षों से लटकाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि जब जमीन उपलब्ध है और सुरक्षा दीवार का निर्माण भी हो चुका है, तो फिर दफनभूमि में अंतिम संस्कार की अनुमति देने में देरी क्यों की जा रही है।
वारिस पठाण ने तत्काल दफनभूमि शुरू करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो महानगरपालिका के खिलाफ व्यापक आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन की स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी जिम्मेदारी महानगरपालिका प्रशासन और आयुक्त की होगी।
वहीं, आयुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को सकारात्मक आश्वासन देते हुए कहा कि मामले पर जल्द निर्णय लेकर दफनभूमि के लोकार्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों की ओर से आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने और सर्वेक्षण के बाद आगे की कार्रवाई करने की बात भी कही गई।
इस अवसर पर एआईएमआईएम वसई-विरार जिलाध्यक्ष अम्मार अब्दुल्लाह पटेल, महिला अध्यक्ष रुबीना अम्मार पटेल, पार्टी नेता रवीश मोमिन, इकबाल शेख, मौलाना जमील अब्दुल्ला हाश्मी, मतीन भाई, जहीर अंसारी, फहीम खान, शादाब आजमी, गुलजार शेख, कफील खान, शानू भाई, शहजाद चौधरी, अनस खान, कारी हनीफ साहब सहित पालघर जिले के एआईएमआईएम पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version