मोहम्मद सिराज, ब्यूरो चीफ, पांढुर्णा (मप्र), NIT:

मराठी साहित्य अकादमी, म.प्र. संस्कृति परिषद, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘मराठी लोकधारा’ कार्यक्रम का 4 अक्टूबर 2026 को एमपीएल ग्राउंड, पांढुर्णा में रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ समापन हुआ। कार्यक्रम के द्वितीय दिवस ‘मराठी पाऊल पडते पुढे’ के अंतर्गत महाराष्ट्र की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक लोक नृत्य एवं लोक गायन की विविध प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
समापन दिवस पर प्रमुख अतिथियों में भाजपा प्रदेश किसान मोर्चा के कोषाध्यक्ष संदीप रघुवंशी तथा पत्रकार संघ से वरिष्ठ पत्रकार उमेश पाल, राम ठाकरे, राधेश्याम बेलखड़े, गुड्डू कावले, देवेंद्र खुरसंगे, प्रमोद कोल्हे, सुनील कवड़े, गौरव बावनकर आदि उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत श्री संतोष गोडबोले, दीपक गुप्ता, तेली समाज के अध्यक्ष श्री भूषण केवटे एवं महिला अध्यक्ष श्रीमती देविका भांगे द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया।
इसके पश्चात मुंबई से आमंत्रित वरिष्ठ कला दल ने दिग्दर्शक एवं निर्माता श्री उदय साटम के निर्देशन में ‘मराठी पाऊल पडते पुढे’ की प्रस्तुति दी। कलाकारों ने महाराष्ट्र की लोक परंपराओं, लोक जीवन एवं सांस्कृतिक विरासत को गीत, संगीत और नृत्य के माध्यम से मंच पर जीवंत किया।
कार्यक्रम में लावणी, गोंधळ, धनगरी गजा, कोळी, पोवाडा, वासुदेव, वाघ्या-मुरली, गौळण, बतावणी, तमाशा, दशावतार, अभंग, जोगवा एवं अन्य पारंपरिक लोक विधाओं की प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण रहीं। पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत एवं वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्तुत किए गए नृत्यों ने पूरे वातावरण को महाराष्ट्र की लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया।
दो दिवसीय ‘मराठी लोकधारा’ कार्यक्रम के माध्यम से पांढुर्णा के दर्शकों को महाराष्ट्र की विविध लोक परंपराओं एवं लोक कलाओं को निकट से देखने और समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक आनंद लिया तथा तालियों से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर मराठी साहित्य अकादमी के निदेशक श्री संतोष गोडबोले ने कहा कि लोक संस्कृति किसी भी समाज की जीवंत पहचान होती है। ‘मराठी लोकधारा’ जैसे आयोजनों के माध्यम से महाराष्ट्र की पारंपरिक लोक कलाओं को मध्यप्रदेश के जनमानस तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
तेली समाज संगठन के अध्यक्ष भूषण केवटे ने नगर की ओर से अकादमी द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा भविष्य में भी इसी प्रकार के आयोजन निरंतर किए जाने का अनुरोध किया।
मंच पर कलाकारों के साथ-साथ युवा एवं मातृशक्ति ने भी नृत्य एवं गायन की प्रस्तुतियां देकर माहौल को और अधिक उत्सवपूर्ण बना दिया।
उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी कलाकारों, सहयोगी संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों, अतिथियों एवं पांढुर्णा के नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दर्शकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘मराठी लोकधारा’ के दो दिवसीय आयोजन के माध्यम से महाराष्ट्र की लोक संस्कृति, लोक नृत्य एवं लोक गायन की समृद्ध परंपरा की मनोहारी झलक पांढुर्णा के दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत हुई।
