मौसम की कहर से किसानों की फसलें हुईं बर्बाद, सरकार की ओर आस की नजर से देख रहे हैं किसान | New India Times

सरवर खान ज़रीवाला, भोपाल, NIT;​मौसम की कहर से किसानों की फसलें हुईं बर्बाद, सरकार की ओर आस की नजर से देख रहे हैं किसान | New India Timesनोटबन्दी से परेशान किसान अब मौसम की मार झेल रहे हैं। बेहताशा ठंड ने हर किसी को कंपकंपा कर रख दीया है। इस कडकडाती ठंड के सर्द हवा के थपेड़ोंने हर किसी का बुरा हाल कर रखा है। इस ठंड का असर फसलों पर भी दिखाई दे रहा है जिससे किसानों के चेहरे की रौनक उड गई है। जब हल्की हल्की ठंड पड रही थी तब आलु, धनिया और चना की फसल देखकर किसान फूले नहीं समा रहे थे, कि अबकी बार की फसल अच्छी आयेगी लेकिन अचानक मौसम अंगडाई ने शीतलहर चला दी। और शीतलहर के कारण अच्छी आने वाली फसलें चौपट होईगई हैं। आज किसान परेशान हैं। दिन-रात एक कर के फसलें लहलहाता है लेकिन आज वही आंसु बहा रहा है। हालांकि यह सब कुदरत के कहर का असर है। इसमें कोई क्या कर सकता है? साल भर का अपने घर का करने वाला किसान मौसम की कहर से कंगाल हो रहा है क्योंकि उसकी फसल चौपट हो जाने के कारण वह कर्ज में डुबा जा रहा है।  किसान बताते हैं कि हमने बडी मेहनत से यह फसल पकाई थी और बाजार से खाद बीज भी उधार लेकर आये थे, अब समझ में नहीं आ रहा है कि हम कर्जा कैसे चुकाएं और परिवार कैसे पालें?  हमारे सामने बडी चिन्ता की लकीर खींची हुई है। कुछ मीडिया कर्मियों ने खुद जाकर फसल का मुआयना किया तो देखा कि लगभग 70% फसल ठंड से जलकर कर खराब  हो गई है। सोमचिढ़ि मार्ग पर स्थित नियाज  मोहम्मद मुल्तानी ने अपने खेत में पहली बार आयुर्वेदिक फसल अश्वगंधा बोई थी और जीजान से मेहनत की थी,  इस फसल को देखकर वह काफी खुश नजर आ रहे थे लेकिन दो दिन की शीतलहर ने पुरी फसल को चौपट कर दिया है। इसके अलावा नागुलाल, सादिक अली,  अमजद शाह,  हफिज खां व अन्य कई किसानों ने पिपलोनकलां इलाके में खेतों में बोया हुआ धनिया व चने की फसल ठंड व पाला के कारण जलकर खाक हो गई है।​मौसम की कहर से किसानों की फसलें हुईं बर्बाद, सरकार की ओर आस की नजर से देख रहे हैं किसान | New India Timesकिसानों ने बताया कि अब हमें सरकार के सहयोग की जरूरत है। मौसम की मार से हमारी फसलें बर्बाद हो गई हैं। ऐसे में हमारे सामने अपने परिवार के पालन पोषण की समस्या खडी हो गई है। इस हालत में हम फसल के लिए लिये गये कर्ज को चुकाने में असमर्थ हैं। इसलिए केंद्र व राज्य सरकार हमें हमारे फसलों का मुआवजा दे ताकि हम कर्जामुक्ति हो सकें और अपना व परिवार का खर्च चला सकें।

किसानों के फसलों की बर्बादी पर शिवराज सिंह चौहान सरकार का रूख क्या होगा यह अभी स्पष्ट नहीं है। अब देखना यह है कि सरकार किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान कर उनका आंसू पोंछती है या उन्हें उनके हाल पर छोड़ देती है ???

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