मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
जुन्नारदेव में सेन समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करने और वर्षों पुरानी मांगों की अनदेखी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। हाल ही में गणेश स्थापना और माता रानी के पंडाल को लेकर हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के विरोध में आज, 1 अक्टूबर 2026 को सेन समाज संगठन, जुन्नारदेव द्वारा नगर में पूर्ण रूप से दुकानें बंद रखने का आह्वान किया गया। समाज में इस घटना को लेकर भारी दुख और आक्रोश व्याप्त है।

क्या है पूरा मामला?
ज्ञापन के माध्यम से सेन समाज ने अपनी पीड़ा और स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को सामने रखा है।
भूमि आवंटन का आश्वासन और बाद में आपत्ति: पूर्व में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री नंदकिशोर वर्मा द्वारा सेन समाज जुन्नारदेव को भवन निर्माण के लिए भूमि आवंटित किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन अब नगर परिषद द्वारा उस पर आपत्ति जताते हुए समाज को अन्यत्र सरकारी भूमि तलाशने के लिए कहा गया है।

खसरा नंबर 689 और सामाजिक आयोजन: वर्तमान में समाज ने रेलवे से लगी सरकारी भूमि (खसरा नंबर 689) पर कब्जा कर रखा है, जहां सामाजिक बैठकें और सेन जयंती जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
गणेश स्थापना और एनओसी (NOC): वार्ड नंबर 10, बंधा रोड पर प्रथम पूजनीय श्री गणेश जी की स्थापना के लिए समाज ने नगर के जनप्रतिनिधियों से विधिवत एनओसी (NOC) प्राप्त की थी।

धार्मिक आस्था को ठेस: माता रानी की स्थापना की संपूर्ण तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा रेलवे प्रशासन को कथित रूप से गुमराह किए जाने के बाद आयोजन को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। समाज का कहना है कि इससे उसकी धार्मिक आस्था को गहरी ठेस पहुंची है।
समाज की प्रमुख मांगें
सेन समाज जुन्नारदेव ने प्रशासन के समक्ष मांग रखी है कि जिस स्थान पर समाज ने भगवान गणेश की स्थापना की थी, उसी स्थान पर आगामी 10 दिनों के लिए शासन-प्रशासन स्तर पर विधिवत अनुमति प्रदान की जाए।
साथ ही, समाज ने कहा है कि यदि उनकी धार्मिक भावनाओं और वर्षों पुरानी सेन भवन की मांग पर शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
इनका कहना है
नगर पालिका अध्यक्ष रमेश सालोडे ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने कहा कि नगर पालिका परिषद द्वारा जेसीबी उपलब्ध नहीं कराई गई है और न ही चबूतरा तोड़ने के कोई आदेश दिए गए हैं।
