फील्ड में काम करने वाली ANM, CHO और आशा कार्यकर्ताओं पर प्रशासनिक सख्ती; बिना नोटिस वेतन रोकने पर भड़के स्वास्थ्यकर्मी | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

फील्ड में काम करने वाली ANM, CHO और आशा कार्यकर्ताओं पर प्रशासनिक सख्ती; बिना नोटिस वेतन रोकने पर भड़के स्वास्थ्यकर्मी | New India Times

जुन्नारदेव के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत मैदानी और फील्ड स्तर के अमले (ANM, CHO, आशा कार्यकर्ता और सेक्टर सुपरवाइजर) का वेतन रोके जाने और बिना किसी वैधानिक कारण के लगातार कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी किए जाने का मामला गरमाता जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मचारियों ने प्रशासनिक कार्रवाई को पूरी तरह से नियम विरुद्ध बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है और चेतावनी दी है कि यदि मनमाने तरीके से वेतन रोकने और प्रताड़ित करने का सिलसिला बंद नहीं हुआ, तो सभी कर्मचारी मजबूरन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

फील्ड में काम करने वाली ANM, CHO और आशा कार्यकर्ताओं पर प्रशासनिक सख्ती; बिना नोटिस वेतन रोकने पर भड़के स्वास्थ्यकर्मी | New India Times

फील्ड के कठिन दायित्व और ‘रिमोट अटेंडेंस’ का यथार्थ

कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि उनका मुख्य कार्य क्षेत्र (फील्ड) में रहकर स्वास्थ्य योजनाओं का क्रियान्वयन करना है। प्रत्येक स्वास्थ्य उपकेंद्र (SHC) के अंतर्गत 3 से 10 तक गांव आते हैं, जहां नियमित रूप से घर-घर जाकर सेवाएं देना अनिवार्य है।

मैदानी स्तर पर किए जाने वाले प्रमुख कार्य:

VHND (ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस): माह में 7 से 8 दिवस।
सेक्टर मीटिंग और समीक्षा बैठकें: 4 से 6 दिवस।
हाई रिस्क ANC गर्भवती महिलाओं के गृह भ्रमण व फॉलोअप: 2 से 3 दिवस।
आभा (ABHA) आईडी निर्माण: अधिक जनसंख्या वाले गांवों में 1 से 2 दिवस।

फील्ड में लगातार भ्रमण और अनुपातिक लक्ष्य प्राप्त करने के दौरान कर्मचारियों की लोकेशन ‘रिमोट’ दर्ज होना स्वाभाविक है। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा भौतिक रूप से कार्यालय में उपस्थिति न होने का हवाला देकर बिना किसी पूर्व कार्य-सुधार के अवसर के वेतन रोकना और नोटिस देना अनुचित है।

महिला कर्मचारियों की दोहरी जिम्मेदारी और मानसिक प्रताड़ना

ज्ञापन और शिकायतों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले में महिला कर्मचारियों की संख्या बहुतायत में है। वे एक तरफ विभागीय राष्ट्रीय कार्यक्रमों की बड़ी जिम्मेदारी निभा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पारिवारिक उत्तरदायित्वों का भी सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं। बिना किसी ठोस कारण के लगातार नोटिस मिलने और वेतन रोके जाने से कर्मचारियों में मानसिक एवं वित्तीय संकट खड़ा हो गया है।

मध्य प्रदेश शासन के नियमों का हवाला

कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश शासन के सेवा नियमों के तहत किसी भी कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई या वेतन रोकने से पूर्व 3 बार स्पष्ट नोटिस देकर सुधार का अवसर दिया जाना अनिवार्य है, जिसका पालन नहीं किया जा रहा है।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि फील्ड कार्यों की व्यावहारिक कठिनाइयों और ‘रिमोट अटेंडेंस’ को विभागीय कार्य में शामिल नहीं किया गया तथा कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो संपूर्ण विकासखंड के स्वास्थ्य कर्मचारी उग्र आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

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