हालात बदलने के लिए आमाल सुधारें और अल्लाह से ताल्लुक मज़बूत करें: मौलाना फुजैल | New India Times

अब्दुल वाहिद काकर, बीड़ (महाराष्ट्र), NIT:

हालात बदलने के लिए आमाल सुधारें और अल्लाह से ताल्लुक मज़बूत करें: मौलाना फुजैल | New India Times

खानकाह हुसैन अहमद मदनी, बीड में शनिवार को जिक्र व सुलूक की मासिक मजलिस का आयोजन किया गया। इसमें मौलाना फुजैल ने कहा कि दुनियावी परेशानियों का समाधान केवल भागदौड़ में नहीं, बल्कि ईमान, नेक अमल, सब्र और अल्लाह से मजबूत ताल्लुक में है। उन्होंने कहा कि इंसान को अपने हालात बदलने से पहले अपने आमाल और अपने रब से रिश्ते का जायजा लेना चाहिए।
मौलाना फुजैल ने कहा कि अल्लाह तआला ने दुनिया को ‘दारुल अस्बाब’ बनाया है और हर काम के लिए एक जरिया और तरीका निर्धारित किया है। जिस तरह आम की गुठली बोने के बाद पौधा, शाखाएं और बौर आने पर फल देती है, उसी तरह जिंदगी में सुकून और खुशहाली के लिए ईमान के साथ नेक आमाल की बुनियाद जरूरी है। आमाल में सुधार होगा तो हालात बदलने की राह भी आसान होगी।
उन्होंने हजरत यूसुफ (अ.स.) की जिंदगी का हवाला देते हुए कहा कि वतन से जुदाई, गुलामी और वर्षों की कैद के बावजूद उन्होंने सब्र, पाकीजगी और अल्लाह के अहकाम को नहीं छोड़ा। इसके बाद अल्लाह तआला ने उन्हें मिस्र की हुकूमत और खजानों की जिम्मेदारी अता की।
मौलाना ने हजरत फुजैल इब्ने अयाज (रह.) के हवाले से कहा कि जब बंदे का अल्लाह से रिश्ता कमजोर होता है तो उसका असर उसके आसपास के माहौल पर भी पड़ता है। तौबा और अल्लाह की ओर रुजू के जरिए यह रिश्ता मजबूत किया जा सकता है, जिससे जिंदगी में सुधार की राह खुलती है।
उन्होंने उम्मुल मोमिनीन हजरत आयशा (रजि.) की हजरत मुआविया (रजि.) को दी गई नसीहत का हवाला देते हुए कहा कि इंसान को अल्लाह को राजी रखने की कोशिश करनी चाहिए, भले ही इसके लिए कुछ लोग नाराज क्यों न हो जाएं। अल्लाह राजी हो जाए तो मखलूक के दिलों में भी मोहब्बत पैदा होती है।
मौलाना फुजैल ने कहा कि इंसान को सबसे पहले आखिरत संवारने की फिक्र करनी चाहिए। सहाबा-ए-किराम और बुजुर्गाने दीन की जिंदगी इस बात की मिसाल है कि जिन्होंने आखिरत को प्राथमिकता दी, अल्लाह तआला ने उन्हें दुनिया में भी इज्जत और जिम्मेदारियां अता कीं। मजलिस में हजरत मौलाना फरीद-ए-वक्त पीर-ए-तरीकत नूरुल हक साहब और सज्जादानशीन हाफिज फुरकान सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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