पांच डेमों में बचा है सालभर के पीने का पानी : लिफ़्ट का बिल कैश कराने के लिए कंपनी में भागदौड़ | New India Times

नरेन्द्र कुमार ब्यूरो चीफ,जलगांव (महाराष्ट्र) NIT:

पांच डेमों में बचा है सालभर के पीने का पानी : लिफ़्ट का बिल कैश कराने के लिए कंपनी में भागदौड़ | New India Times


तीन से पांच जुलाई तीन दिन उसके बाद सितंबर के दो दिन कुल मिलाकर महज पांच दिन की मानसून वर्षा ने महाराष्ट्र को सुखे मे झोंक दिया है । सारा प्रदेश अकाल की चपेट मे आ गया है , कोंकण इलाके की बारिश ने मुंबई के पेयजल की चिंता खत्म कर दी लेकिन मराठवाड़ा , उत्तर महाराष्ट्र ,  पश्चिमी महाराष्ट्र , विदर्भ के सभी 30 जिले भीषण गर्मी मे झुलस रहे है ।देवेन्द्र फड़नवीस सरकार मे एक जल मंत्रालय मे दो मंत्री है । बयानबाजी के अलावा दोनो मंत्रियो का मेरिट कार्ड जीरो शून्य है ।जलगांव के गिरणा , भोकरबारी , अंजनी , मन्याड , बोरी , सुकी , वाघूर में 70% पानी है ! पिछली रिपोर्ट मे हमने बताया कि वाघूर के 12 टीएमसी मे से मौजूदा 09 के विनियोग को लेकर प्रशासन ने कटौती शुरू कर दी है।किसानो उद्योगो को नोटिस इश्यू होने लगे है ! जलगांव के दक्षिणी छोर के सात ब्लॉक पहले से ड्राई जोन का शिकार है। जामनेर ब्लॉक मे तमाम छोटे छोटे तालाब खाली पड़े है ! जिला प्रशासन की तरफ से अहिल्या नगर के टैंकर का नियोजन कही नज़र नही आ रहा है। सुखे को अवसर मे बदलने वाले खनिज चोरो ने नदियो को उजड़ना तेज कर दिया है। रातभर बिना नंबर के सैकड़ो डंपर हज़ारो ब्रास बालू की तस्करी कर करोड़ो रुपया कमा रहे है ।

पांच डेमों में बचा है सालभर के पीने का पानी : लिफ़्ट का बिल कैश कराने के लिए कंपनी में भागदौड़ | New India Times

लिफ़्ट के बिल पर नज़र :
सूखे के कारण वाघूर लिफ़्ट योजना अंतर्गत GVPR इंजीनियरिंग कंपनी द्वारा बनाए जा रहे 3500 कृषि तालाबों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे है । सूत्रों से पता चल रहा है कि सुखे के डर से कंपनी और प्रशासन दोनो आपसी सहमति से जमीन के नीचे बिछी पाइप लाइन के बिल निकालने की योजना पर काम कर रहे है। जानकार बताते है कि जो तालाब 10 लाख रुपए मे बनना चाहिए उसे 30 लाख रुपए मे बनाया जा रहा है । आशीर्वाद का इतना महंगा दिया किसके वैभव को चमकाने के लिए जलाया जा रहा है यह जनता को पता भी है ?

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