बारिश के खंड से खरीफ फसलें संकट में, यवतमाल को सूखाग्रस्त घोषित करने और प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये मुआवजा देने की मांग; 2 अक्टूबर तक फैसला नहीं हुआ तो सत्याग्रह और आमरण अनशन की चेतावनी | New India Times

मक़सूद अली, ब्यूरो चीफ, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

बारिश के खंड से खरीफ फसलें संकट में, यवतमाल को सूखाग्रस्त घोषित करने और प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये मुआवजा देने की मांग; 2 अक्टूबर तक फैसला नहीं हुआ तो सत्याग्रह और आमरण अनशन की चेतावनी | New India Times

यवतमाल जिले में बारिश का लंबा खंड पड़ने से खरीफ फसलों पर संकट गहराता जा रहा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से सोयाबीन, कपास, तुअर, मूंग और उड़द जैसी प्रमुख फसलों की वृद्धि प्रभावित होने का दावा किया गया है। स्थिति को देखते हुए भाई अमन ने पूरे यवतमाल जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग शासन से की है।
भाई अमन ने कहा कि बारिश के अभाव में किसानों को उत्पादन में कमी के साथ आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। शासन को जमीनी स्थिति का तत्काल आकलन कर प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यवतमाल के अलावा रालेगांव, बाबुलगांव, कलंब, उमरखेड़ और महागांव तहसीलों में भी बारिश की कमी से प्रभावित फसलों का सर्वे कराकर सूखा घोषित करने की मांग की।
उन्होंने प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये मुआवजा देने तथा फसल नुकसान का तत्काल सर्वेक्षण और पंचनामा कराने की मांग रखी है। उनका कहना है कि समय पर आर्थिक सहायता नहीं मिलने पर किसानों की परेशानी और बढ़ सकती है।
2 अक्टूबर तक निर्णय नहीं तो आंदोलन
भाई अमन ने चेतावनी दी कि यदि 2 अक्टूबर, गांधी जयंती तक यवतमाल जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने और किसानों को राहत देने के संबंध में निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन किया जाएगा। इसके तहत जिलाधिकारी कार्यालय के सामने सत्याग्रह तथा आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

प्रमुख मांगें:-
पूरे यवतमाल जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित किया जाए।
प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए।
प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
फसल नुकसान का तत्काल सर्वेक्षण व पंचनामा कराया जाए।
2 अक्टूबर तक निर्णय नहीं होने पर सत्याग्रह व आमरण अनशन किया जाए।

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