जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:
भोपाल: सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, मध्य प्रदेश में ₹10.99 करोड़ की हार्डवेयर खरीद में हुई कथित गड़बड़ी पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) भोपाल ने 1 सितंबर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।
जांच में सामने आए मुख्य बिंदु और साक्ष्य:
1. डमी फर्में और कृत्रिम प्रतिस्पर्धा (Cartelization)
GeM पोर्टल पर टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली चारों बोलियों (Bids) का नियंत्रण एक ही नेटवर्क/व्यक्ति के पास पाया गया।
इन फर्मों के साझा GST खाते, एक समान मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और आधिकारिक पते दर्ज थे।
इसका उद्देश्य टेंडर प्रक्रिया में बाहरी निष्पक्ष कंपनियों को बाहर रखकर आपस में ही ठेका सुनिश्चित करना था।
2. टेंडर से पहले ही इंस्टॉलेशन (पुराने उपकरण)
विभाग द्वारा टेंडर 23 सितंबर 2024 को जारी किया गया, जबकि जांच और वारंटी रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित कंप्यूटर 22 जुलाई 2024 को ही स्थापित (Install) किए जा चुके थे। लगभग दो महीने पहले लगे उपकरणों को बाद के टेंडर में ‘नया’ दर्शाकर आपूर्ति दिखाई गई।
3. घटिया कलपुर्जे व फर्जी ऑथराइजेशन
मूल निर्माता (OEM) के निर्धारित मानकों के विपरीत स्थानीय स्तर पर खरीदे गए गैर-ब्रांडेड SSD और सब-स्टैंडर्ड RAM का उपयोग किया गया।
टेंडर पात्रता हासिल करने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनी (Acer India) का कथित रूप से फर्जी ऑथराइजेशन लेटर जमा किया गया, जिसकी पुष्टि स्वयं निर्माता कंपनी ने की।
4. UPS दरों में भारी अंतर
जिस UPS मॉडल की GeM पोर्टल पर सामान्य दर लगभग ₹3,754 और अंकित मूल्य (MRP) ₹6,086 था, उसे विभाग को ₹11,247 प्रति यूनिट की दर पर सप्लाई किया गया।
निर्माता कंपनी ने जांच में यह भी स्पष्ट किया कि टेंडर में दर्ज मॉडल की वास्तविक आपूर्ति नहीं की गई थी।
नामजद आरोपी व आगे की कार्रवाई
EOW ने शिकायत के आधार पर रणधीर पटेल, हेमलता, अशोक कुमार सिंह और देवेंद्र सिंह सहित संबंधित फर्मों (जैसे साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, सूरज एंटरप्राइजेज आदि) के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने इन फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश के साथ-साथ विभागीय स्तर पर टेंडर स्वीकृति, तकनीकी सत्यापन और भुगतान पास करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच तेज कर दी है।
