चार साल से अतिरिक्त प्रभार में एडीओ पंचायत की जिम्मेदारी, लालगंज की 53 ग्राम पंचायतों की व्यवस्था पर उठे सवाल | New India Times

मुराद खान, लालगंज/मिर्ज़ापुर (यूपी), NIT:

चार साल से अतिरिक्त प्रभार में एडीओ पंचायत की जिम्मेदारी, लालगंज की 53 ग्राम पंचायतों की व्यवस्था पर उठे सवाल | New India Times

लालगंज विकासखंड की 53 ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं और पात्र लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था, पंचायत स्तर पर कथित अनियमितताओं और शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने को लेकर ग्रामीणों में चर्चा तेज है।
बताया जा रहा है कि सचिव अजय शंकर लंबे समय से एडीओ पंचायत का अतिरिक्त दायित्व संभाल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, उनके पास एडीओ पंचायत की जिम्मेदारी के साथ दो क्लस्टरों का अतिरिक्त कार्यभार भी रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतने महत्वपूर्ण दायित्वों की नियमित समीक्षा किस स्तर पर की गई और पंचायतों में संचालित योजनाओं की निगरानी कितनी प्रभावी ढंग से हुई।

खबरों के बाद भी जांच का इंतजार
अजय शंकर की कार्यप्रणाली और अतिरिक्त प्रभार को लेकर पूर्व में भी खबर प्रकाशित कर संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया था। इसके बावजूद अब तक किसी ठोस विभागीय जांच या कार्रवाई की सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आने से मामले को लेकर चर्चाएं बढ़ गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं तो विभागीय जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। वहीं, यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
विकास कार्यों और योजनाओं की जांच की मांग
ग्रामीणों ने लालगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में पिछले वर्षों के विकास कार्यों और लाभार्थीपरक योजनाओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी धन से कराए गए कार्यों के अभिलेखों की जांच के साथ मौके पर भौतिक सत्यापन भी कराया जाए।
सड़क, नाली, पंचायत भवन, स्वच्छता, आवास, शौचालय समेत अन्य विकास कार्यों में यदि अनियमितता की शिकायत है तो संबंधित भुगतान, कार्यादेश और अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।
अंत्योदय कार्डों की पात्रता पर भी सवाल
इसी बीच अंत्योदय राशन कार्डों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लाभार्थियों की पात्रता पर कथित तौर पर सवाल खड़े किए गए हैं। वहीं, यह भी चर्चा है कि कुछ मामलों में पात्रता निर्धारण और प्रस्ताव की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पुराने अंत्योदय कार्डों की सूची, पात्रता संबंधी अभिलेख, ग्राम पंचायत के प्रस्ताव, बैठकों के कार्यवृत्त और लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन कराया जाना जरूरी माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि योजना का लाभ पात्र लोगों को मिला या नहीं।
कथित कमीशनखोरी की चर्चाओं से बढ़ी चिंता
लालगंज क्षेत्र में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में कथित कमीशनखोरी तथा अनियमितताओं की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। बावजूद इसके, ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
चार साल के अतिरिक्त प्रभार पर उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल लंबे समय से चले आ रहे अतिरिक्त प्रभार को लेकर है। यदि विभागीय आवश्यकता के चलते सचिव को एडीओ पंचायत का अतिरिक्त दायित्व दिया गया था तो इसकी समय-समय पर समीक्षा क्यों नहीं की गई? साथ ही यह भी जांच का विषय है कि अतिरिक्त प्रभार के दौरान पंचायतों की निगरानी, योजनाओं की समीक्षा और प्रशासनिक कार्य किस प्रकार संचालित किए गए।
पूर्व में मामले को लेकर ब्लॉक स्तर के अधिकारी ने हाल में पदस्थ होने की बात कहते हुए प्रकरण को देखने का आश्वासन दिया था। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
ग्रामीणों का कहना है कि मामला किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ आरोप लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किस अधिकारी के पास कौन-सा दायित्व था, योजनाओं की निगरानी किस स्तर पर हुई, लाभार्थियों का चयन किन आधारों पर किया गया और शिकायतें सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की।
अब निगाह जिला पंचायत राज विभाग, खंड विकास अधिकारी और अन्य संबंधित उच्च अधिकारियों पर है। यदि आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में खर्च होने वाले प्रत्येक रुपये का हिसाब और पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचना प्रशासन की जवाबदेही है।

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