त्रिवेंद्र जाट, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

सागर जिले के देवरी विकासखंड अंतर्गत महाराजपुर संकुल के शासकीय स्कूलों में लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि संकुल क्षेत्र के कई प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों की ई-अटेंडेंस के लिए ऐसी लोकेशन निर्धारित की गई हैं, जो संबंधित स्कूल परिसरों से अलग हैं। इससे शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार महाराजपुर संकुल के अंतर्गत छिंद, छगोड़ा, पुटदेही, अरसी, भरई, बंधा, सिमरिया, झमरा सहित अन्य स्कूलों की ई-अटेंडेंस के लिए संकुल स्तर पर लोकेशन निर्धारित किए जाने की बात सामने आई है। वहीं झमारा, रमखिरिया और अर्जुंदा सहित कुछ स्कूलों की लोकेशन शासकीय प्राथमिक शाला सिलकुही में निर्धारित होने की जानकारी भी शिकायत में दी गई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस व्यवस्था का कुछ शिक्षकों द्वारा कथित रूप से दुरुपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि निर्धारित लोकेशन से ई-अटेंडेंस दर्ज करने के बाद कुछ शिक्षक अपने वास्तविक कार्यस्थल से बाहर चले जाते हैं और शाम की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पुनः निर्धारित लोकेशन पर पहुंचते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बीआरसी की भूमिका पर भी सवाल
मामले में देवरी बीआरसी हरिकृष्ण चौबे की भूमिका को लेकर भी शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया है कि उनकी जानकारी अथवा मिलीभगत से ऐसी व्यवस्था संचालित हो रही है। हालांकि इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षकों की वास्तविक और समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि स्कूल से अलग स्थानों को नियमित उपस्थिति दर्ज कराने के लिए निर्धारित किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
ई-अटेंडेंस और वास्तविक उपस्थिति के मिलान की मांग
मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी, डीपीसी, कलेक्टर एवं संभागायुक्त सागर से जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने महाराजपुर संकुल सहित देवरी विकासखंड के सभी संकुलों में ई-अटेंडेंस के लिए निर्धारित लोकेशन की जांच कराने तथा पिछले कुछ महीनों की ई-अटेंडेंस, जीपीएस लोकेशन और स्कूलों में शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति का मिलान कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच में यदि नियमों के उल्लंघन अथवा फर्जी उपस्थिति की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वहीं आरोप निराधार पाए जाने पर विभाग द्वारा वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर भ्रम की स्थिति समाप्त की जानी चाहिए।
