मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:
करीब पांच दशक से धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएं दे रहे बुरहानपुर के बुजुर्ग धार्मिक विद्वान एवं सेवानिवृत्त शिक्षक हज़रत मौलाना अलहाज डॉक्टर हाफ़िज़ सलीम गिन्नौरी नदवी को उनकी 50 वर्षों की दीन व मिल्लत की सेवाओं के सम्मान में राब्ता-ए-उलेमा-ए-दकन की ओर से ‘इकरा अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी लंबे समय से जारी निस्वार्थ सेवाओं के प्रति सम्मान और आभार का प्रतीक है।
मौलाना सलीम गिन्नौरी नदवी ने धार्मिक शिक्षा के साथ सैफिया हमीदिया यूनानी चिकित्सा महाविद्यालय, गणपतिनाका, बुरहानपुर से बीयूएमएस की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने सरकारी विद्यालय में शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं और सेवानिवृत्ति तक आधुनिक शिक्षा के साथ धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा के माध्यम से मुस्लिम समाज की नई पीढ़ी के शैक्षणिक, धार्मिक और नैतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पिछले वर्ष वे सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए, लेकिन उनकी सामाजिक और धार्मिक सेवाओं का सिलसिला आज भी जारी है। धार्मिक विद्वान के रूप में मौलाना सलीम गिन्नौरी नदवी लंबे समय से मस्जिद दारुश्शिफा, खानकाह वार्ड, बुरहानपुर में प्रत्येक सप्ताह जुमा के खुतबे के माध्यम से मुस्लिम समाज को धार्मिक, नैतिक और सामाजिक विषयों पर मार्गदर्शन देते आ रहे हैं। बुरहानपुर में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और कल्याणकारी गतिविधियों में भी उनकी सलाह और सरपरस्ती महत्वपूर्ण रही है।
शहर के प्रमुख धार्मिक संस्थान दारुल उलूम शेख अली मुत्तकी, आदिलपुरा, उतावली सराय के विकास और मजबूती में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने जिले के प्रमुख धार्मिक विद्वान मुफ्ती रहमत उल्लाह कासमी के साथ मिलकर संस्था के विकास के लिए अपनी सेवाएं दीं।
बुरहानपुर में ‘मअहद अली मियां नदवी’ की स्थापना महत्वपूर्ण उपलब्धि
उनकी प्रमुख शैक्षणिक सेवाओं में नदवतुल उलमा, लखनऊ की शाखा ‘मअहद अली मियां नदवी’, बुरहानपुर की स्थापना भी उल्लेखनीय है। इस संस्था ने अपने दस वर्ष पूरे कर लिए हैं। यहां नदवतुल उलमा, लखनऊ के पाठ्यक्रम के अनुसार पांच वर्षीय धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम संचालित किया जाता है।
मध्य प्रदेश सहित महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के विद्यार्थी यहां तीन वर्ष की शिक्षा प्राप्त करने के बाद शेष दो वर्षों की शिक्षा के लिए लखनऊ जाते हैं। अब तक इस संस्था से 75 विद्यार्थी आलिम और हाफ़िज़ की शिक्षा पूरी कर विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक विद्वान के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्तमान में यहां करीब 115 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
बीमारी के बावजूद सेवा का जज़्बा कायम
उम्र के इस पड़ाव पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद मौलाना सलीम गिन्नौरी नदवी के सेवा भाव में कोई कमी नहीं आई है। ऐसे समय में मिला ‘इकरा अवॉर्ड’ उनकी पांच दशक लंबी धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक सेवाओं के प्रति सम्मान को और महत्वपूर्ण बनाता है।
मौलाना की सेवाएं किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही हैं। वे धर्मगुरु, शिक्षक, यूनानी चिकित्सक, वक्ता और सामाजिक मार्गदर्शक के रूप में समाज का मार्गदर्शन करते आ रहे हैं।
‘इकरा अवॉर्ड’ उनकी लंबी सेवा यात्रा में एक महत्वपूर्ण सम्मान है। इस अवसर पर बुरहानपुर के अनेक धार्मिक विद्वानों, परिवारजनों, शिष्यों, साथियों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए बेहतर स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।
