फरक्का जल संधि से बिहार के हितों की हो रही है हकमारी, पुनर्विचार जरूरी: जदयू | New India TimesOplus_131072

अतीश दीपंकर, ब्यूरो चीफ, पटना (बिहार), NIT:

फरक्का जल संधि से बिहार के हितों की हो रही है हकमारी, पुनर्विचार जरूरी: जदयू | New India Times

बिहार के भोजपुर जिले में जदयू की ओर से ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पार्टी ने फरक्का जल संधि को बिहार के हितों के प्रतिकूल बताते हुए केंद्र सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई। कार्यक्रम में जदयू नेताओं ने कहा कि संधि के कारण बिहार को जल संकट, बाढ़ और सिंचाई संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
आरा के धनपुरा स्थित ग्रैंड रिसॉर्ट में आयोजित कार्यक्रम में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान फरक्का जल संधि से बिहार पर पड़ने वाले प्रभावों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई गई तथा जागरूकता सामग्री का वितरण किया गया।

फरक्का जल संधि से बिहार के हितों की हो रही है हकमारी, पुनर्विचार जरूरी: जदयू | New India Times

संजय कुमार झा ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं है। इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। यदि भविष्य में कोई समझौता होता है तो उसमें वर्ष 2050 तक बिहार की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि संधि के कारण बिहार का जल प्रबंधन प्रभावित हुआ है और राज्य गंभीर जल संकट की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि संधि के तहत शुष्क मौसम में बक्सर के पास गंगा का प्रवाह करीब 400 क्यूमेक तक रह जाने के बावजूद फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूमेक पानी छोड़ने का प्रावधान है। जदयू का दावा है कि इससे बिहार के जल संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और राज्य के किसानों की सिंचाई, पेयजल, उद्योग तथा लोगों की आजीविका प्रभावित होती है।
प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री एवं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार लंबे समय से फरक्का बराज और जल संधि से बिहार को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाते रहे हैं। उनके अनुसार फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद जमा होने से नदी का तल ऊंचा हुआ है, जिससे उत्तर बिहार में बाढ़ की समस्या बढ़ती है। वहीं, शुष्क मौसम में पानी के बंटवारे के कारण बिहार के कई इलाकों में जल संकट की स्थिति पैदा होती है।
उन्होंने कहा कि यह अभियान किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि बिहार के अधिकार और जनता के हितों से जुड़ा जनसरोकार का मुद्दा है। जदयू इस विषय को जनता के बीच ले जाकर बिहार की आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचाना चाहता है।
कार्यक्रम में विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा, विधायक राधाचरण साह, प्रदेश महासचिव एवं कार्यक्रम प्रभारी अंजुम आरा तथा कार्यकारी जिलाध्यक्ष भीम पटेल समेत अन्य नेता उपस्थित रहे।
जदयू के अनुसार ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ अभियान के तहत गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों—बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से हुई है और इसका समापन कटिहार में होगा।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version