मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:

उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला का गृह जिला और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ससुराल रीवा का संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय एक बार फिर चर्चा में है। अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करीब 80 वर्षीय महिला मरीज को चिकित्सकों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद अगले दिन उसके जीवित मिलने का मामला सामने आया है। मरीज की सांसें चलती मिलने के बाद उसे दोबारा गंभीर रोगी वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। घटना सामने आने के बाद अस्पताल की चिकित्सा प्रक्रिया और मरीज को मृत घोषित किए जाने के तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, डॉक्टर इसे बेहद दुर्लभ चिकित्सकीय स्थिति बता रहे हैं।
गंभीर हालत में सीधी से रीवा लाई गई थीं मरीज
जानकारी के अनुसार, सीधी निवासी करीब 80 वर्षीय गिरिजा गुप्ता को गंभीर हालत में रेफर किए जाने के बाद 4 सितंबर को संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों की निगरानी में उपचार चल रहा था। इलाज के दौरान जूनियर डॉक्टर ने मरीज का परीक्षण किया। जांच के दौरान सांसें नहीं चलने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद अस्पताल में मरीज की मृत्यु से संबंधित प्रक्रिया भी पूरी किए जाने की बात सामने आई है।
दस्तावेजों में मृत, अगले दिन जीवित मिलीं
मामले में सबसे हैरान करने वाली स्थिति अगले दिन 5 सितंबर को सामने आई। जिस मरीज को एक दिन पहले मृत घोषित किया गया था, उसमें दोबारा सांसें चलती मिलीं। इसके बाद अस्पताल में हड़कंप की स्थिति बन गई। मरीज को तत्काल दोबारा गंभीर रोगी वार्ड में भर्ती कराया गया और उपचार शुरू किया गया। फिलहाल उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी है।
मरीज को मृत घोषित करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल
घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मरीज को मृत घोषित करने से पहले किन चिकित्सकीय मानकों और जांच प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। दूसरी ओर, अस्पताल में तैयार किए गए दस्तावेजों में मरीज को मृत बताया गया था। ऐसे में अगले दिन मरीज के जीवित मिलने की घटना ने अस्पताल की चिकित्सा प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डॉक्टर बोले- बेहद दुर्लभ चिकित्सकीय स्थिति
मामले को लेकर डॉक्टर पीके बघेल ने इसे बेहद दुर्लभ चिकित्सकीय स्थिति बताया है। उनके अनुसार, कुछ मामलों में गंभीर स्थिति वाले बुजुर्ग मरीजों में ऐसी असामान्य परिस्थिति देखने को मिल सकती है। डॉक्टर ने बताया कि देश में इस तरह के कुछ दुर्लभ मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि, इस मामले में मरीज की वर्तमान स्थिति गंभीर बनी हुई है और उनका उपचार जारी है।
अब अस्पताल की प्रक्रिया पर रहेगी नजर
मरीज के जीवित मिलने के बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल मरीज गंभीर रोगी वार्ड में भर्ती हैं और डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। घटना सामने आने के बाद यह भी महत्वपूर्ण हो गया है कि अस्पताल में किसी मरीज को मृत घोषित करने से पहले अपनाई जाने वाली चिकित्सकीय प्रक्रिया का कितनी सख्ती से पालन किया जाता है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों के स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि मरीज को मृत घोषित किए जाने के पीछे वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति क्या थी।
