राकेश यादव, ब्यूरो चीफ, सागर (मप्र), NIT:
गणेशोत्सव के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम सागर एवं ढाना क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। स्थानीय युवाओं की टोली लगातार 13 वर्षों से पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाओं के निर्माण और नि:शुल्क वितरण का अभियान चला रही है। इस वर्ष यह अभियान अपने 14वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।
इस पहल के तहत गौ-गोबर, पंचगव्य और शुद्ध मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। प्रतिमाओं के निर्माण में गंगा, नर्मदा और बेबस नदी के जल का भी उपयोग किया जा रहा है। गणेश चतुर्थी से पहले इन प्रतिमाओं का श्रद्धालुओं को पूर्णतः नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।
अभियान की शुरुआत अपर शासकीय लोक अभियोजक दीपक पौराणिक ने की थी। नदियों और जलाशयों में प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की प्रतिमाओं के विसर्जन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए उन्होंने मिट्टी से बनी पारंपरिक गणेश प्रतिमाओं को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। शुरुआत में कुछ मित्रों के सहयोग से शुरू हुआ यह प्रयास अब जनजागरूकता के अभियान का रूप ले चुका है।
दीपक पौराणिक के अनुसार, अभियान का उद्देश्य PoP और रासायनिक रंगों से बनी प्रतिमाओं के बजाय जैविक एवं पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं को प्रोत्साहित करना है। साथ ही लोगों को प्रतिमाओं का विसर्जन घर के गमलों या बगीचे में करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि प्रतिमा की मिट्टी पौधों के लिए उपयोगी बन सके।
इस अभियान में दीपक पौराणिक और आशीष पाठक सहित युवाओं की टीम सक्रिय रूप से जुटी हुई है। युवाओं का कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है। सागर की यह पहल न केवल जल स्रोतों और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने का संदेश दे रही है, बल्कि लोगों को प्रकृति के अनुकूल गणेशोत्सव मनाने के लिए भी प्रेरित कर रही है।

