मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:
गणेशोत्सव आस्था और श्रद्धा का पर्व है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी जुड़ी है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए बुरहानपुर की महिलाओं द्वारा मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं तैयार कर पर्यावरण अनुकूल गणेशोत्सव का संदेश दिया जा रहा है।
मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं तैयार करने वाली लताबाई वाणे, हेमलताबाई वाणे एवं मंगलाबाई वाणे द्वारा स्थानीय स्तर पर प्रतिमाओं का निर्माण किया जा रहा है। इनके द्वारा वाणे आर्ट्स एवं धुर्व आर्ट्स के नाम से मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं।
महिलाओं की कला और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके योगदान को प्रोत्साहित करते हुए ताप्ती सेवा समिति, बुरहानपुर द्वारा पुष्पमाला पहनाकर उनका सम्मान किया गया। समिति ने कहा कि महिलाओं द्वारा मिट्टी की प्रतिमाएं बनाना केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा कार्य नहीं है, बल्कि यह महिला स्वावलंबन, स्थानीय रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है।
ताप्ती सेवा समिति ने आमजन से अपील की कि गणेशोत्सव के दौरान मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं को प्राथमिकता दें, ताकि विसर्जन के दौरान जलस्रोतों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके। साथ ही स्थानीय महिला कलाकारों से प्रतिमाएं खरीदकर उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने में सहयोग करें।
इस अवसर पर समिति अध्यक्ष श्रीमती सरिता राजेश भगत, वरिष्ठ मार्गदर्शक मंसुर सेवक, देवचंद शर्मा, धर्मेंद्र सोनी, डॉ. यूसुफ खान, मोहन दलाल, विजय राठौड़, प्रवक्ता विवेक हकीम, नंदकुमार वाणे, राजेश भगत सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
समिति ने संदेश दिया—
“मिट्टी की गणेश प्रतिमा अपनाएं, पर्यावरण बचाएं, महिलाओं को रोजगार से जोड़ें और मां ताप्ती को स्वच्छ रखें।”
