अली अब्बास, ब्यूरो चीफ, मथुरा (यूपी), NIT:

भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा और संगठन के प्रति करीब 29 वर्षों से निरंतर सक्रिय जहीर अब्बास जैदी ने मथुरा से निकलकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है। भाजपा के सक्रिय, कर्मठ, मिलनसार और स्वच्छ छवि वाले नेता के रूप में उनकी राजनीतिक यात्रा पदों से अधिक संगठन के प्रति निष्ठा, विचारधारा में विश्वास और लंबे संघर्ष के लिए पहचानी जाती है।
जहीर अब्बास जैदी का मानना है कि सच्चा कार्यकर्ता वही है, जो संगठन के अच्छे और कठिन, दोनों दौर में उसके साथ मजबूती से खड़ा रहे। इसी सोच के साथ उन्होंने करीब 29 वर्ष पहले भाजपा से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। उस समय भाजपा आज की तरह मजबूत राजनीतिक स्थिति में नहीं थी और किसी मुस्लिम चेहरे का भाजपा के साथ सक्रिय राजनीति में आगे आना अपने आप में चुनौतीपूर्ण माना जाता था। इसके बावजूद जैदी ने राजनीतिक सुविधा या सत्ता के आकर्षण के बजाय संगठन और विचारधारा को प्राथमिकता दी।
उन्होंने जमीनी स्तर से शुरुआत करते हुए वार्ड अध्यक्ष से लेकर प्रदेश स्तर तक विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। वर्तमान में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा में लगातार दूसरी बार प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पार्टी के संगठनात्मक अभियानों, जनसंपर्क कार्यक्रमों और मुस्लिम समाज के बीच भाजपा की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों में उनकी सक्रिय भूमिका बताई जाती है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय पहचान
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जहीर अब्बास जैदी की सक्रियता सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी दिखाई देती है। उनके समर्थकों के अनुसार NaMo App और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 5 लाख 42 हजार से अधिक एक्टिव पॉइंट दर्ज हैं। दावा है कि यह आंकड़ा मथुरा जिले के कई बड़े पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से भी अधिक है। फेसबुक पर भी उनके 32 हजार से अधिक फॉलोअर्स बताए जाते हैं। वे NaMo App और सरल ऐप सहित विभिन्न डिजिटल माध्यमों के जरिए पार्टी की योजनाओं, उपलब्धियों, सदस्यता अभियानों और संगठनात्मक कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार से जुड़े रहते हैं।
जैदी की राजनीतिक कार्यशैली में संगठनात्मक गतिविधियों के साथ डिजिटल माध्यमों के जरिए जनसंपर्क को भी विशेष स्थान मिला है। पार्टी की नीतियों और केंद्र एवं प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के साथ ही सदस्यता अभियान में डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर भी वे जोर देते रहे हैं।
करीब तीन दशक के राजनीतिक सफर में उनकी सबसे बड़ी पहचान संगठन के प्रति निरंतर सक्रियता और भरोसे के रूप में सामने आई है। सत्ता के बदलते समीकरणों के बीच भी उन्होंने राजनीतिक सुविधा के लिए अपना रास्ता बदलने के बजाय उसी संगठन के साथ काम करना जारी रखा, जिसे उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का आधार बनाया। यही निरंतरता उन्हें भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चे में एक अलग पहचान दिलाती है।
