रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

श्री ऋषभदेव बावन जिनालय की पावन धरा पर वर्तमान सोधर्म-बृहत्तपागच्छाधिपति परम पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय जयानंद सूरीश्वर जी महाराज साहेब के दीक्षा अर्ध-शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर गुरु भक्ति एवं संयम अनुमोदना का अनुपम वातावरण देखने को मिला। विदुषी साध्वी श्री अविचलद्रष्टा श्री जी म.सा. आदि ठाणा-7 की पावन निश्रा में जैन श्रीसंघ झाबुआ द्वारा गुरु गुणानुवाद सभा, सामूहिक सामायिक, आयम्बिल तप, नवकार महामंत्र जाप एवं प्रभु भक्ति सहित विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर पूज्य गुरुदेव के दीर्घ एवं प्रभावशाली संयम जीवन की अनुमोदना की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर पूज्य गुरुदेव के दीर्घ एवं प्रभावशाली संयम जीवन की अनुमोदना की।
गुरु गुणानुवाद सभा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
श्रीसंघ के रिंकू रूनवाल ने बताया कि पुण्य सम्राट श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वर जी म.सा. के पट्टधर गच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वर जी म.सा. एवं आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय जयरत्न सूरीश्वर जी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी तपस्वी साध्वी श्री शशिकलाश्री जी म.सा. की सुशिष्या विदुषी साध्वी श्री अविचलद्रष्टा श्री जी म.सा. आदि ठाणा-7 की पावन निश्रा में प्रातः 9:15 बजे गुरु गुणानुवाद सभा का शुभारंभ हुआ।
इस अवसर पर साध्वी श्री अविचलद्रष्टा श्री जी म.सा. ने पूज्य गच्छाधिपति आचार्य श्री जयानंद सूरीश्वर जी महाराज साहेब की संयम साधना की अनुमोदना करते हुए कहा कि दीक्षा ग्रहण करने के पश्चात पूज्य गुरुदेव ने उत्कृष्ट संयम साधना के माध्यम से भगवान महावीर के सत्य, अहिंसा एवं अपरिग्रह के सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात किया और उन्हें जन-जन तक पहुंचाने का भगीरथ कार्य किया।
उन्होंने कहा कि 89 वर्ष की आयु में भी जिस दृढ़ता, सजगता और उत्कृष्टता के साथ पूज्य गुरुदेव संयम जीवन की साधना कर रहे हैं, वह साधु जीवन की उत्कृष्ट पालना का अनुपम उदाहरण है। उनका जीवन प्रत्येक साधक के लिए प्रेरणादायी प्रकाशस्तंभ है।
“जैन श्रीसंघ झाबुआ के शिरस्थ गुरु भगवंत हैं आचार्य श्री जयानंद सूरीश्वर जी”
श्रीसंघ अध्यक्ष संजय मेहता ने गुरु गुणानुवाद करते हुए कहा कि “जैन श्रीसंघ झाबुआ के शिरस्थ गुरु भगवंत गच्छाधिपति आचार्य श्री जयानंद सूरीश्वर जी महाराज साहेब हैं।” पूज्य गुरुदेव के मार्गदर्शन, प्रेरणा एवं आशीर्वाद से झाबुआ में अंजनशलाका प्रतिष्ठा, उपधान तप सहित अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्य संपन्न हुए हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूज्य गुरुदेव की आज्ञा में 200 से अधिक साधु-साध्वी भगवंत विचरण कर रहे हैं। उनकी निश्रा में 50 से अधिक उपधान तप संपन्न हुए, जिनमें 15,000 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं ने सूत्रों की ज्ञान-वाचना लेकर योगोद्वहन किया। यह जिनशासन की प्रभावना के क्षेत्र में वर्तमान समय की गौरवपूर्ण उपलब्धि है।
400 से अधिक ग्रंथों के माध्यम से जिनवाणी को जन-जन तक पहुंचाया
श्रीसंघ के वरिष्ठ सदस्य अशोक कटारिया ने कहा कि पूज्य गुरुदेव ने 400 से अधिक पुस्तकों का लेखन कर भगवान महावीर के संदेश, जिनवाणी एवं आध्यात्मिक ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का अतुलनीय कार्य किया है।
श्रीमती हंसा कोठारी ने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि पूज्य श्री चलते-फिरते भगवान के समान हैं तथा दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेंद्र सूरीश्वर जी महाराज साहेब की साक्षात प्रतिमूर्ति प्रतीत होते हैं।
इस अवसर पर आयु छाजेड़ ने भावपूर्ण गीत की प्रस्तुति देकर गुरुदेव के प्रति अपनी श्रद्धा एवं भक्ति के भाव व्यक्त किए।
विशुद्ध चारित्र की साधना से जिनशासन प्रभावना को मिली नई गति
वरिष्ठ सुश्रावक धर्मचंद मेहता, मनोहरलाल छाजेड़ एवं निखिल भण्डारी ने कहा कि पूज्य गुरुदेव विशुद्ध चारित्र के पालक एवं जिनशासन के प्रभावक संत हैं। उन्होंने सैकड़ों जिन मंदिरों एवं गुरु मंदिरों की प्रतिष्ठा करवाई, अनेक उपाश्रयों के निर्माण की प्रेरणा दी तथा विभिन्न संघों में निश्रा प्रदान कर जिनशासन के अनेक प्रभावक कार्यों को गति प्रदान की।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में 1,500 से अधिक आराधकों के साथ श्री शंखेश्वर तीर्थ, गुजरात में पूज्य गुरुदेव का चातुर्मास प्रवर्तमान है।
सामूहिक सामायिक एवं आयम्बिल तप में उमड़ी श्रद्धा
संयम अनुमोदना के क्रम में दोपहर को आयम्बिल तप एवं सामूहिक सामायिक का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। इस दौरान नवकार महामंत्र एवं गुरुदेव द्वारा प्रदत्त मंत्रों का जाप किया गया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा एवं भक्तिभाव से सराबोर हो गया।
सायंकाल प्रतिक्रमण के पश्चात श्री ऋषभदेव बावन जिनालय को दीपकों से भव्य रूप से सजाया गया। जिनालय में आयोजित संगीतमय प्रभु भक्ति में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए और आदिनाथ प्रभु की भक्ति में भावविभोर हो गए।
गुरुदेव के 50वें दीक्षा वर्ष में 9 करोड़ जाप का महासंकल्प
गुरुदेव के दीक्षा अर्ध-शताब्दी वर्ष को ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्मरणीय बनाने के लिए झाबुआ श्रीसंघ द्वारा वर्षभर विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी।
इसी क्रम में दादा गुरुदेव द्वारा प्रदत्त मंत्रों के 9 करोड़ जाप करने का सामूहिक संकल्प झाबुआ श्रीसंघ द्वारा लिया गया। वर्षभर आयोजित होने वाले अमृत अनुष्ठानों के माध्यम से अधिकाधिक श्रावक-श्राविकाओं को साधना एवं भक्ति से जोड़ने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।
गुरु गुणानुवाद, संयम अनुमोदना, सामूहिक आराधना और 9 करोड़ जाप के महासंकल्प से सुसज्जित यह आयोजन झाबुआ के जैन समाज के लिए गुरु भक्ति, जिनशासन प्रभावना और आध्यात्मिक चेतना का अविस्मरणीय अवसर बन गया।
