मोहम्मद इस्हाक़ मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:
संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल से संबद्ध गांधी मेमोरियल अस्पताल में 25-26 अगस्त को प्रसव के बाद 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर नारी चेतना मंच ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मंच की वरिष्ठ नेत्री मीरा पटेल, डॉ. श्रद्धा सिंह और समता संपर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी महिला चिकित्सक एवं संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रसव के दौरान उपचार में लापरवाही और रिश्वत मांगने जैसे गंभीर आरोप परिजनों द्वारा लगाए गए हैं। घटना से पहले का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मृतका कथित तौर पर मदद के लिए अपने परिजनों से गुहार लगाती नजर आ रही है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।
नारी चेतना मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन पूर्व के अनुभवों को देखते हुए उन्हें आशंका है कि जांच को महज औपचारिकता तक सीमित न कर दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित महिला चिकित्सक पर वर्ष 2023 में भी इसी तरह के आरोप लगे थे और कार्रवाई की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में मामला शांत हो गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित चिकित्सक का निजी प्रसूता नर्सिंग होम संचालित है, जिसके कारण सरकारी अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिलाओं के उपचार को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मंच ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों की जिम्मेदारी तय करने तथा दोष सिद्ध होने पर बर्खास्तगी के साथ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की।
नेताओं ने प्रदेश सरकार की सुरक्षित प्रसव व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं और बड़े बजट के बावजूद अस्पतालों में जच्चा-बच्चा की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में अनुभवी दाइयों की मदद से घरों में प्रसव होते थे, लेकिन वर्तमान में प्रसव व्यवस्था के बढ़ते व्यवसायीकरण और निजी नर्सिंग होमों पर निर्भरता से गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।
उन्होंने सरकार से ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित प्रसव के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों एवं आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करने तथा सरकारी अस्पतालों में प्रसूता महिलाओं को बेहतर और जवाबदेह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
