संजीवनी मतिमंद आवासीय स्कूल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग | New India Times

मक़सूद अली, ब्यूरो चीफ, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

संजीवनी मतिमंद आवासीय स्कूल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग | New India Times

पांढरकवड़ा रोड स्थित आसमा बहुउद्देशीय संस्था द्वारा संचालित संजीवनी मतिमंद आवासीय स्कूल की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संस्था की एक शिक्षिका द्वारा 23 अगस्त को यवतमाल के सरकारी विश्रामगृह में आयोजित पत्रकार परिषद के बाद संस्था के प्रशासन, कर्मचारियों को दी गई अनुमति, सेवा नियमों और दिव्यांग विद्यार्थियों की गोपनीयता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
इस मामले में मोहम्मद आसिम अंसारी ने जिला सक्षमीकरण अधिकारी, दिव्यांग कल्याण विभाग, समाज कल्याण विभाग तथा संस्था के पदाधिकारियों को शिकायत देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि संबंधित शिक्षिका ने व्यक्तिगत विषय को लेकर पत्रकार परिषद आयोजित करने के लिए संस्था से अनुमति मांगी थी। आरोप है कि अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई थी, जिनमें स्कूल का नाम, विद्यार्थियों की जानकारी तथा संस्था के आंतरिक विषयों को सार्वजनिक नहीं करने जैसी शर्तें शामिल थीं। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि इन शर्तों का उल्लंघन हुआ है तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।

विद्यार्थियों की गोपनीयता का मुद्दा
शिकायतकर्ता ने आवासीय स्कूल में अध्ययनरत दिव्यांग विद्यार्थियों की सुरक्षा, सम्मान और गोपनीयता को संवेदनशील विषय बताते हुए कहा कि यदि विद्यार्थियों अथवा संस्था की आंतरिक व्यवस्था से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की गई है तो उसकी वैधानिकता की जांच आवश्यक है। साथ ही यह भी जांच की जाए कि इससे विद्यार्थियों के हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ा।

सेवा नियमों के पालन की जांच की मांग
अनुदानित विशेष विद्यालयों के कर्मचारियों पर लागू सेवा शर्तों, अनुशासन और आचारसंहिता का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि जांच में नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

सरकारी विश्रामगृह के उपयोग पर भी सवाल
शिकायत के अनुसार 23 अगस्त को दोपहर करीब 1 बजे यवतमाल के सरकारी विश्रामगृह में पत्रकार परिषद आयोजित की गई थी। शिकायतकर्ता ने सरकारी विश्रामगृह के उपयोग की अनुमति, स्थान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया और संबंधित नियमों के पालन की भी जांच की मांग की है। इस संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय से आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।

आरोपों की सत्यता की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पत्रकार परिषद के दौरान उनके खिलाफ कथित रूप से झूठे और बिना प्रमाण के आरोप लगाए गए। उन्होंने पत्रकार परिषद की वीडियो रिकॉर्डिंग, प्रकाशित समाचारों तथा सोशल मीडिया और यूट्यूब पर उपलब्ध वीडियो की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने भारतीय न्याय संहिता के मानहानि संबंधी प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने और आरोप प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से तीन दिनों के भीतर मामले का संज्ञान लेने की मांग करते हुए कार्रवाई नहीं होने पर दिव्यांग कल्याण आयुक्तालय, समाज कल्याण विभाग और न्यायालयीन स्तर पर दाद मांगने की चेतावनी दी है।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version