अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

राजधानी भोपाल के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी देने के लिए लगाए गए सरकारी साइन बोर्ड इन दिनों राजनीतिक पोस्टरों से पटे नजर आ रहे हैं। इन बोर्डों पर क्षेत्र के नाम और दिशा संबंधी जानकारी के बजाय नेताओं, मंत्रियों और विधायकों के फोटो वाले पोस्टर दिखाई दे रहे हैं।
जन्मदिन, राजनीतिक कार्यक्रम या सरकारी योजनाओं से जुड़े प्रचार-प्रसार के लिए अलग से होर्डिंग और विज्ञापन बोर्ड लगाए जाते हैं। इसके बावजूद सरकारी साइन बोर्डों पर पोस्टर लगाए जाने से व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

खास बात यह है कि 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम समाप्त हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन कई स्थानों पर झंडावंदन और अन्य कार्यक्रमों से जुड़े पोस्टर अब भी सरकारी साइन बोर्डों पर लगे हुए हैं।इससे शहर की सुंदरता और स्वच्छता व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
नगर निगम की व्यवस्था के अनुसार किसी भी राजनीतिक दल या संगठन के बैनर-पोस्टर कार्यक्रम समाप्त होने के बाद हटाए जाने चाहिए। इसमें किसी दल के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। संबंधित क्षेत्र के नगर निगम के सहायक स्वच्छता प्रभारी (एचओ) और कर्मचारियों की जिम्मेदारी होती है कि सार्वजनिक स्थानों पर लगे अनधिकृत बैनर-पोस्टरों को हटाया जाए।
हालांकि, शहर के कई हिस्सों में कर्मचारी इन पोस्टरों की अनदेखी करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सरकारी साइन बोर्डों पर पोस्टर लगाना नियमों के अनुरूप नहीं है तो इन्हें हटाने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
शहर की स्वच्छता और सार्वजनिक स्थलों को व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। ऐसे में सरकारी साइन बोर्डों को राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनने से रोकने और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद पोस्टरों को तत्काल हटाने की जरूरत है।
