अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:
मध्यप्रदेश में निजी नर्सिंग कॉलेजों में अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के बाद अब शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में प्राचार्य, उप प्राचार्य तथा आवश्यक शैक्षणिक फैकल्टी की कमी और मान्यता के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में कथित अनियमितताओं को लेकर NSUI ने रविवार को पत्रकारवार्ता आयोजित कर सरकार और मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के समक्ष गंभीर सवाल उठाए।
कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि मध्यप्रदेश में शिक्षा माफिया के इशारों पर सरकारी विश्वविद्यालयों और सरकारी कॉलेजों को या तो बंद किया जा रहा है या फिर उसका निजीकरण किया जा रहा है। मप्र में 29 शासकीय विश्वविद्यालय हैं जबकि प्राइवेट विश्वविद्यालय दोगुना 54 हो गई हैं जिसमें कई प्राइवेट विश्वविद्यालय फर्जी तरीके से संचालित हो रहे हैं ।
एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजों में तो फर्जीवाड़ा चल रहा है लेकिन मध्य प्रदेश शासन द्वारा संचालित शासकीय नर्सिंग कॉलेज में भी बड़ा फर्जीवाड़ा है जिसको लेकर हमने पिछले वर्ष भी शिकायत की थी लेकिन उसके बावजूद भी सुधार नहीं किए गए जब सरकारी नर्सिंग कॉलेज में ही फैकल्टी में बड़ा फर्जीवाड़ा है तो हम प्राइवेट कॉलेज से क्या उम्मीद कर सकते हैं ।
रवि परमार ने बताया कि सत्र 2026-27 की मान्यता के लिए 22 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में आवेदन किया था जिसमें से तीन शासकीय नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता नहीं दी गई है जिसमें राजधानी भोपाल मे केन्द्र सरकार द्वारा संचालित बीएमएचआरसी नर्सिंग कॉलेज , अमरकंटक विश्वविद्यालय अनुपपुर का शासकीय नर्सिंग कॉलेज , दतिया का शासकीय नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं।
परमार ने बताया कि 06 शासकीय नर्सिंग कॉलेज ऐसे हैं जिसमें प्राचार्य ( प्रिंसिपल) ही नहीं हैं वहीं 10 ऐसे शासकीय नर्सिंग कॉलेज हैं जिनमें उप प्राचार्य ( वाइस प्रिंसिपल ) नहीं हैं वहीं अधिकांश शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में प्रोफेसर , एसोसिएट प्रोफेसर , असिस्टेंट प्रोफेसर एवं ट्यूटर भी मध्यप्रदेश शासन के मान्यता नियम 2018 के अनुसार नहीं हैं ।
रवि परमार ने कहा कि सत्र 2026-27 की मान्यता के लिए शासकीय नर्सिंग कॉलेज द्वारा किए गए आवेदनों में कई शासकीय नर्सिंग कॉलेजों ने प्राचार्य ( प्रिंसिपल) , प्राचार्य ( वाइस प्रिंसिपल ) , एसोसिएट प्रोफेसर के फर्जी एवं कूटरचित अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए । जिसका सबसे बड़ा उदाहरण राजधानी भोपाल का शासकीय नर्सिंग कॉलेज बीएमएचआरसी हैं जिसमें असिस्टेंट प्रोफेसर को सीधा वाइस प्रिंसिपल दर्शा दिया गया वहीं उप प्राचार्य को एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर दर्शा दिया गया यहीं नहीं अमरकंटक विश्वविद्यालय के नर्सिंग कॉलेज जोकि कि अभी खुला ही नहीं हैं वहां पर प्राचार्य ने 01 वर्ष 06 माह का अनुभव और उप प्राचार्य ने 03 वर्ष का अनुभव दर्शाया जबकि कालेज अभी शुरू ही नहीं हुआ हैं ।
अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय ने कहा कि मध्यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की दो बार सीबीआई जांच हुई हैं उसमें कई शासकीय नर्सिंग कॉलेज में कमियां मिली थी उसके बावजूद लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा उन कमियों को दूर नहीं किया लेकिन बिना शैक्षणिक फैकल्टियों के नर्सिंग स्टूडेंट्स का प्रशिक्षण पूरा नहीं हो सकता हैं हमनें इसको लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इसको लेकर जोकि भी जिम्मेदार हैं उनकी जिम्मेदारी तय कर कार्यवाही की मांग की हैं ।
अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने बताया कि मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल द्वारा नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने के लिए मध्यप्रदेश शासन का मान्यता नियम 2018 हैं जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि किसी भी कालेज को शासकीय एवं अशासकीय को मान्यता के लिए 01 प्राचार्य, 01 उप प्राचार्य , 02 एसोसिएट प्रोफेसर , 03 असिस्टेंट प्रोफेसर अथवा 03 ट्यूटर होना अनिवार्य हैं और यहां सिर्फ 30 सीटों के लिए अगर इससे अधिक सीटों के लिए आवेदन किया है तो सीटों के अनुपात के हिसाब से फैकल्टियों की संख्या में परिवर्तन होगा
विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं — NSUI
NSUI नेताओं ने कहा कि नर्सिंग शिक्षा सीधे स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी हुई है। सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में ही यदि प्राचार्य, उप प्राचार्य और आवश्यक फैकल्टी उपलब्ध नहीं होगी तथा मान्यता प्रक्रिया में प्रस्तुत दस्तावेजों को लेकर सवाल उठेंगे, तो इसका सीधा असर हजारों नर्सिंग विद्यार्थियों की शिक्षा और भविष्य पर पड़ेगा।
NSUI ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की इन अनियमितताओं पर तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और आवश्यक सुधार की कार्रवाई नहीं की, तो संगठन विद्यार्थियों के साथ मिलकर चरणबद्ध आंदोलन करेगा और इस मुद्दे को सड़क से लेकर न्यायालय तक मजबूती से उठाएगा।
पत्रकारवार्ता में कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी, NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार , अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं अधिवक्ता अंशुल तिवारी उपस्थित रहे।
