मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
जनपद पंचायत जुन्नारदेव में पेसा एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सरपंचों एवं पंचायत सचिवों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। जनपद पंचायत की सीईओ रश्मि चौहान तथा मास्टर ट्रेनर एवं जिला समन्वयक कमलेश टेकाम और राजू बर्मन ने पंचायत प्रतिनिधियों एवं सचिवों को पेसा एक्ट के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा के लिए ग्राम सभा को अनेक महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान किए गए हैं। प्राकृतिक संसाधनों, जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय आदिवासी समुदाय के अधिकारों को सुरक्षित रखने के प्रावधानों की जानकारी दी गई। लघु वनोपज के संग्रहण, उपयोग और प्रबंधन में ग्राम सभा की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में भी बताया गया।
आदिवासी भूमि के अवैध हस्तांतरण एवं बिक्री को रोकने तथा भूमि से संबंधित मामलों में ग्राम सभा की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। इसी प्रकार रेत, गिट्टी सहित खनिज संसाधनों के खनन और लीज से जुड़े मामलों में ग्राम सभा की अनुशंसा के प्रावधानों की जानकारी दी गई।
सामाजिक एवं आर्थिक मामलों में ग्राम सभा को स्थानीय स्तर पर शराब की बिक्री एवं उपयोग को नियंत्रित करने, हाट-बाजार के प्रबंधन तथा साहूकारी व्यवस्था को विनियमित करने जैसे अधिकारों के बारे में भी प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण में बताया गया कि पेसा एक्ट का उद्देश्य आदिवासी समुदाय को शोषण से सुरक्षा प्रदान करना और उनके पारंपरिक अधिकारों को मजबूत करना है। साहूकारों द्वारा अत्यधिक ब्याज वसूली तथा आदिवासी भूमि के अवैध हस्तांतरण जैसी समस्याओं पर नियंत्रण के लिए ग्राम सभा की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही जनजातीय समुदाय की पारंपरिक रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक पहचान और रूढ़िगत व्यवस्थाओं के संरक्षण पर भी जोर दिया गया।
लघु वनोपज और स्थानीय संसाधनों के प्रबंधन से आदिवासी समुदाय की आजीविका को मजबूत करने तथा पंचायत स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के संबंध में भी जानकारी दी गई। गांव के विकास से जुड़े स्कूल, आंगनबाड़ी, सड़क सहित विभिन्न कार्यों की प्राथमिकताएं ग्राम सभा में तय करने के प्रावधानों पर चर्चा की गई।
प्रशिक्षण में जनपद पंचायत के वरिष्ठ अधिकारी, उपयंत्री, सहायक यंत्री, विभागीय अधिकारी, सरपंच एवं पंचायत सचिव उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कहा कि पेसा एक्ट के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू कर आदिवासी समुदाय को उनके अधिकारों एवं योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।
