वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

नौरंगाबाद रोड स्थित सलेमपुर कोन पॉलिटेक्निक के पास संचालित बताए जा रहे जानकी हॉस्पिटल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही और बिना विशेषज्ञ चिकित्सक के प्रसव कराने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं, अस्पताल के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
ग्राम सिरैचा, थाना खीरी निवासी जितेंद्र सिंह के मुताबिक, प्रसव पीड़ा होने पर उन्होंने अपनी पत्नी को उक्त अस्पताल में भर्ती कराया था। आरोप है कि अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने करीब पांच घंटे तक सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया। इस दौरान प्रसूता की हालत बिगड़ती रही। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए भर्ती समाप्त करने की गुहार लगाई, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने कथित तौर पर उन्हें रेफर नहीं किया।
परिजनों के अनुसार, बाद में नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद पीड़ित पिता ने जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता से फोन पर शिकायत कर अस्पताल संचालक एवं संबंधित स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा जांच किए जाने की बात कही गई है।
अस्पताल के पंजीकरण और चिकित्सकीय व्यवस्था पर उठे सवाल
पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि अस्पताल बिना वैध पंजीकरण के संचालित हो रहा है और वहां योग्य चिकित्सक की मौजूदगी नहीं रहती। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। स्वास्थ्य विभाग की जांच में अस्पताल के पंजीकरण, चिकित्सकीय स्टाफ की योग्यता और घटना के दौरान अपनाई गई चिकित्सा प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
मारपीट के मामले में भी पहले से चर्चा में अस्पताल
जानकी हॉस्पिटल को लेकर एक अन्य शिकायत भी सामने आई है। मोहल्ला प्रकाश नगर सैधरी निवासी पत्रकार आशीष गुप्ता ने स्वास्थ्य मंत्री को शिकायत भेजकर अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के मुताबिक, 15 अगस्त को शुभकामना संदेश लेने के लिए अस्पताल परिसर पहुंचे पत्रकार के साथ कथित तौर पर अस्पताल की संचालिका और वहां मौजूद कुछ लोगों ने मारपीट की, जिसमें उन्हें चोटें आईं। इस संबंध में थाना कोतवाली सदर में मुकदमा दर्ज होने की बात कही गई है।
पत्रकार आशीष गुप्ता ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में कोई योग्य चिकित्सक नहीं है और यह कथित रूप से किसी डॉक्टर के संरक्षण में संचालित किया जा रहा है। उन्होंने जनहित में अस्पताल की जांच कर आवश्यक कार्रवाई तथा उसे सील कराने की मांग की है।
हालांकि अस्पताल प्रबंधन का पक्ष इस संबंध में सामने नहीं आया है। नवजात की मौत और अस्पताल के संचालन से जुड़े आरोपों की वास्तविकता स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
