मुबारक अली, ब्यूरो चीफ, शाहजहांपुर (यूपी), NIT:
विश्व स्तनपान सप्ताह के समापन अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के सहयोग से अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन द्वारा जनजागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महासम्मेलन के जिला अध्यक्ष डॉ. विजय जौहरी ने की। गोष्ठी का उद्देश्य भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार, आयुर्वेदिक जीवनशैली के प्रति जनजागरूकता तथा सरकार की मंशा के अनुरूप मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
मुख्य वक्ता डॉ. सुमन अग्रवाल ने कहा कि आयुर्वेद में माँ के दूध को शिशु के लिए अमृत समान माना गया है। यह शिशु को आवश्यक पोषण प्रदान करने के साथ उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता, शारीरिक एवं मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि स्तनपान के दौरान शिशु को एक स्तन से पर्याप्त समय तक दूध पीने देना चाहिए, ताकि उसे शुरुआत में आने वाले दूध के साथ-साथ बाद में आने वाला वसा एवं ऊर्जा से भरपूर दूध भी पर्याप्त मात्रा में मिल सके।
डॉ. सुमन अग्रवाल, डॉ. रचना रस्तोगी, डॉ. पल्लवी सक्सेना, डॉ. आंचल गुप्ता एवं डॉ. सुविया ने बताया कि सफल स्तनपान के लिए शिशु का स्तन से सही लगाव होना आवश्यक है। शिशु की ठोड़ी स्तन से सटी हो, उसका मुँह पर्याप्त रूप से खुला हो, निप्पल के आसपास का एरिओला नीचे की अपेक्षा ऊपर अधिक दिखाई दे तथा शिशु गहरे और लयबद्ध तरीके से दूध पीता हुआ दिखाई दे। ये संकेत बताते हैं कि शिशु सही तरीके से स्तनपान कर रहा है और उसे पर्याप्त दूध मिल रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है, नवजात शिशु के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच के समान होता है। इसलिए इसे कभी भी फेंकना नहीं चाहिए। उन्होंने सभी माताओं से छह माह तक शिशु को केवल माँ का दूध पिलाने तथा छह माह के बाद पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की अपील की।
परिवार नियोजन के संदर्भ में चिकित्सकों ने बताया कि प्रसव के बाद पहले छह माह तक यदि शिशु को केवल माँ का दूध पिलाया जा रहा हो और माँ का मासिक धर्म दोबारा शुरू न हुआ हो, तो विशेष स्तनपान गर्भधारण की संभावना को कम कर सकता है। हालांकि, परिवार नियोजन के लिए चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार अन्य सुरक्षित साधनों का भी उपयोग किया जा सकता है।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. विजय जौहरी ने कहा कि अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन भारत की गौरवशाली आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार, उसके वैज्ञानिक सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने तथा समाज में आयुर्वेदिक आचार-विचार को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार एवं भारत सरकार की मंशा के अनुरूप महासम्मेलन समय-समय पर जनहित में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
अंत में सभी चिकित्सकों एवं उपस्थितजनों ने सफल स्तनपान के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।
