विवेक जैन, बागपत (यूपी), NIT:
ग्राम पटोली, जनपद बागपत में बुधवार को स्वर्गीय मास्टर सुखबीर सिंह की तेरहवीं के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा एवं रस्म पगड़ी का आयोजन किया गया। इस दौरान क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
स्वर्गीय मास्टर सुखबीर सिंह अपने सरल, सौम्य एवं मिलनसार व्यक्तित्व के लिए क्षेत्र में विशेष पहचान रखते थे। उन्होंने जीवनभर शिक्षा, सामाजिक सद्भाव, नैतिक मूल्यों और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका जीवन सादगी, ईमानदारी और मानवीय मूल्यों का प्रतीक रहा। उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यों से समाज में ऐसी अमिट छाप छोड़ी, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनके निधन से क्षेत्र ने एक सम्मानित एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व को खो दिया है।
कार्यक्रम के दौरान परंपरा के अनुसार उनके पुत्र अनिल ढाका को पगड़ी पहनाई गई। इस अवसर पर बागपत विधायक योगेश धामा, बागपत सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान, जिला पंचायत सदस्य सुभाष गुर्जर, जिला पंचायत अध्यक्ष मेरठ गौरव चौधरी, राष्ट्रीय लोक दल के वरिष्ठ नेता सुखबीर सिंह गठीना, अंतरराष्ट्रीय जाट महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मन्नू चौधरी दांतल, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य मीनाक्षी भराला, जिला पंचायत सदस्य संजय डीलर तथा जिला जाट सभा बागपत के अध्यक्ष एडवोकेट सोमेंद्र ढाका सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने शोक संदेश भेजकर तथा उपस्थित सामाजिक हस्तियों ने अपने संबोधन के माध्यम से स्वर्गीय मास्टर सुखबीर सिंह को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने उनके महान व्यक्तित्व एवं समाज के प्रति योगदान को अविस्मरणीय बताया।
श्रद्धांजलि सभा के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा ईश्वर से प्रार्थना की कि वे पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
इस अवसर पर अमित ढाका, ऋषभ ढाका, सिद्धार्थ ढाका, राष्ट्रीय लोक दल युवा के क्षेत्रीय महासचिव अनुज ढाका, महामहिम राष्ट्रपति एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार विपुल जैन तथा सुप्रसिद्ध समाजसेवी गजेंद्र सिंह सांगवान सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
