रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

केशव विद्या पीठ में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। तत्पश्चात पूज्य गुरुदेव के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद सभी विद्यार्थियों ने सनातन परंपरा के अनुसार गायत्री मंत्र के साथ श्रद्धापूर्वक हवन में आहुतियां अर्पित की।

इस अवसर पर शिक्षक शुभम राव ने विद्यार्थियों को गुरु पूर्णिमा के महत्व से अवगत कराते हुए बताया कि यह पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण का प्रतीक है। यह गुरु और शिष्य के बीच अटूट विश्वास एवं आध्यात्मिक संबंध को मजबूत करने का अवसर भी है। गुरु पूर्णिमा को आषाढ़ पूर्णिमा तथा व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि यह दिन अपने गुरु द्वारा दिए गए ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है। हमारे जीवन में गुरु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। माता-पिता के बाद गुरु ही हमें अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से ही हमें जीवन की सही दिशा और उद्देश्य प्राप्त होता है।
गुरु पूर्णिमा का संबंध महर्षि वेदव्यास से भी माना जाता है। मान्यता है कि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही उनका जन्म हुआ था। उन्हें आदिगुरु के रूप में सम्मानित किया जाता है और उनके सम्मान में ही गुरु पूर्णिमा मनाने की परंपरा चली आ रही है।
कार्यक्रम के अंत में शिक्षक शुभम राव ने सभी विद्यार्थियों को संकल्प दिलाया कि वे गुरु के प्रति सदैव श्रद्धा और विश्वास बनाए रखेंगे, उनके बताए मार्ग पर चलेंगे, समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेंगे, स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देंगे तथा भारतीय संस्कृति और मूल्यों का सम्मान करेंगे। कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षिका श्रीमती शची भार्गव ने किया।
